बीएयू, सबौर में प्रभावी सार्वजनिक भाषण कला पर ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित किया।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन टीचिंग एंड लर्निंग (CETL) द्वारा शनिवार, 4 जुलाई 2026 को “प्रभावी सार्वजनिक भाषण कला: आत्मविश्वास के साथ प्रभावशाली संवाद” विषय पर एक ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के संप्रेषण कौशल, मंच संचालन क्षमता तथा प्रभावी प्रस्तुतीकरण कौशल का विकास करना था।
कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ. राधिका खन्ना, एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (प्रभारी), इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं मास कम्युनिकेशन विभाग, पांडिचेरी विश्वविद्यालय थीं। अपने संवादात्मक एवं अनुभवात्मक व्याख्यान में उन्होंने बताया कि प्रभावी सार्वजनिक वक्तृत्व केवल विषय-वस्तु की तैयारी पर नहीं, बल्कि भावनाओं के संतुलन और आत्मविश्वास पर आधारित होता है। उन्होंने कहा कि आत्म-सचेतता, अत्यधिक चिंतन तथा दूसरों के मूल्यांकन का भय मंच पर होने वाली घबराहट के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को गलतियाँ होने की चिंता छोड़कर सार्थक संवाद पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
मंच भय को दूर करने के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा करते हुए डॉ. खन्ना ने बॉक्स ब्रीदिंग तथा भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि सचेत श्वास-प्रश्वास शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे व्यक्ति शांत, संयमित एवं एकाग्र होकर श्रोताओं के समक्ष प्रभावी ढंग से अपनी बात रख सकता है। उन्होंने कहा कि सचेत श्वास, सजगता तथा वर्तमान क्षण में रहने की आदत सार्वजनिक वक्तृत्व में आत्मविश्वास बढ़ाने के प्रभावी साधन हैं। साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों को भाषण की विषय-वस्तु पर ध्यान देने से पहले स्वयं को मानसिक रूप से तैयार करने की सलाह दी।
डॉ. खन्ना ने श्रोताओं को प्रभावी ढंग से जोड़ने के लिए भाषण की सशक्त शुरुआत, प्रभावशाली समापन, उचित विराम तथा स्पष्ट अभिव्यक्ति के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को स्वयं पर विश्वास रखने, संयम बनाए रखने तथा नियमित अभ्यास करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आत्मविश्वास जन्मजात नहीं होता, बल्कि निरंतर अभ्यास से विकसित होता है। कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने मंच भय से मुक्ति, प्रभावी प्रस्तुति तथा व्यावसायिक संप्रेषण कौशल को बेहतर बनाने से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे। प्रतिभागियों ने कार्यशाला की व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक शैली की सराहना करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया।
इस कार्यशाला में एमबीए (एग्रीबिजनेस) के विद्यार्थियों, स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों तथा संकाय सदस्यों सहित 48 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन टीचिंग एंड लर्निंग (CETL), बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के संरक्षण में किया गया। कार्यशाला की संयोजक डॉ. श्वेता शांभवी, निदेशक छात्र कल्याण, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर थीं, जबकि कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन डॉ. आदित्य सिन्हा, प्रभारी, CETL, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा किया गया।
