शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों पर व्यापक एवं सार्थक चर्चा हुई।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।
आनन्दराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर में आयोजित त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला के दूसरे दिन शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों पर व्यापक एवं सार्थक चर्चा हुई। इस अवसर पर विद्यालय की व्यवस्थाओं में गुणात्मक सुधार लाने, परीक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने तथा शिक्षण कार्य को और अधिक उत्कृष्ट बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्य योजना निर्माण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन पर चर्चा, समय सारणी पर चर्चा, पंचपदी शिक्षण एवं पाठ्यक्रम क्रियान्वयन पर चर्चा ,अंग्रेजी संभाषण एवं संस्कृत संभाषण के साथ ही साथ सुलेख एवं शैक्षणिक और सह शैक्षणिक व्यवस्था पर समीक्षात्मक चर्चा, कर्मचारीयों के कार्यों की समीक्षा कर विद्यालय सर्वश्रेष्ठ कैसे बने इस पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला में विद्यालय में संधारित विभिन्न पंजियों की पूर्णता एवं अद्यतन स्थिति सुनिश्चित करने के विषय पर भी गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। साथ ही भाषा के अलावा अन्य विषयों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणामों को बेहतर बनाने के लिए नवीन एवं प्रभावी उपायों पर गहन चिंतन मंथन हुआ।
आचार्यों ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षण पद्धतियों में नवाचार अपनाने, तकनीकी साधनों के समुचित उपयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष बल दिया। इस निमित्त आदर्श पाठ योजना का निर्माण कर विषयों को प्रतिपादित किया गया। इस अवसर पर भागलपुर जिला के जिला निरीक्षक श्रीमान सतीश कुमार सिंह जी को विद्यालय के उप प्रधानाचार्य श्रीमान अशोक कुमार ने उन्हें अंग वस्त्र एवं पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। जिला निरीक्षक ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सतत सुधार एवं विद्यार्थियों को श्रेष्ठतम मार्गदर्शन प्रदान करना रहा है। उन्होंने विद्या भारती की रीति- नीति एवं लक्ष्य की चर्चा करते हुए आचार्य नियमावली की जानकारी देते हुए कहा कि जिला निरीक्षक श्रीमान सतीश कुमार सिंह जी ने कहा कि “आचार्य कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सतत सुधार एवं विद्यार्थियों को श्रेष्ठतम मार्गदर्शन प्रदान करना है। विद्या भारती की रीति-नीति और लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, आचार्यों को अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना चाहिए, जिससे वे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकें। आचार्य नियमावली के अनुसार, शिक्षकों को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीमान सुमंत कुमार जी ने कहा कि “आचार्य कार्यशाला के माध्यम से हमें अपने शिक्षकों को नवीन शिक्षण तकनीकों और कक्षा प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षित करने का अवसर मिला है। इससे हमारे शिक्षक अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन कर सकेंगे और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर सकेंगे। हमारा लक्ष्य है कि हमारे विद्यालय के विद्यार्थी न केवल शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट हों, बल्कि उनका चरित्र और व्यक्तित्व भी विकसित हो।”सत्र का संचालन श्री शैलेन्द्र कुमार तिवारी, श्रीमती श्वेता झा, श्रीमती रश्मि पाठक,श्री सुमंत कुमार जी ने किया। पंचम सत्र मुक्त चिंतन, खेलकूद एवं संघ प्रार्थना के पश्चात् सम्पन्न हुआ।
