त्रिभाषा सूत्र से विकसित होगी भाषाई दक्षता एवं राष्ट्रीय एकात्मता का भाव: धरणीकांत पांडेय।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/ बिहार।
भारती शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति, बिहार द्वारा आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग एवं सेवा स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग-2026 के अठारहवें दिवस का शुभारंभ गणपतराय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर, सैनिक स्कूल, नरगा कोठी, भागलपुर के विशाल प्रशाल में प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा, वीरेंद्र कुमार,धरणीकांत पांडेय एवं लालबाबू प्रसाद द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया गया।
प्रथम सत्र में “विद्या भारती की संगठनात्मक संरचना” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए प्रदेश सचिव प्रदीप कुमार कुशवाहा ने कहा कि विद्या भारती विश्व का सबसे बड़ा गैर-सरकारी शैक्षिक संगठन है, जो शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि संगठन की कार्यपद्धति अत्यंत सुव्यवस्थित एवं सुदृढ़ है, जिसमें विद्यालय, संकुल, जिला, विभाग, प्रांत एवं अखिल भारतीय स्तर तक की संरचना समन्वित रूप से कार्य करती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक आचार्य को संगठन की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों एवं दायित्वों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे विद्यालय के साथ-साथ संगठन के विस्तार एवं सशक्तिकरण में भी सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने आचार्यों से अपेक्षा की कि वे स्वयं को केवल शिक्षक न मानकर राष्ट्र निर्माण के एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में विकसित करें तथा अपने आचरण, व्यवहार एवं कार्यशैली से विद्यार्थियों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करें।
द्वितीय सत्र में गयाजी विभाग के विभाग निरीक्षक उमाशंकर पोद्दार ने “कक्षा प्रबंधन एवं माइक्रो टीचिंग” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि एक सफल शिक्षक वही है जो कक्षा में अनुशासन, संवाद एवं शिक्षण की प्रभावशीलता के बीच संतुलन स्थापित कर सके। उन्होंने कहा कि कक्षा प्रबंधन केवल विद्यार्थियों को नियंत्रित करने का माध्यम नहीं, बल्कि उनके भीतर सीखने की रुचि एवं सहभागिता विकसित करने की प्रक्रिया है। माइक्रो टीचिंग के माध्यम से शिक्षक अपनी शिक्षण कला का अभ्यास कर सकते हैं तथा अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार कर सकते हैं। उन्होंने विभिन्न शिक्षण कौशलों जैसे प्रश्न पूछने की कला, ब्लैकबोर्ड लेखन, उदाहरणों का प्रभावी प्रयोग, समय प्रबंधन एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षण में शिक्षक को सतत सीखने एवं स्वयं को अद्यतन रखने की आवश्यकता है, तभी शिक्षा अधिक प्रभावी एवं परिणामकारी बन सकती है।
तृतीय सत्र में रोहतास विभाग के विभाग निरीक्षक धरणीकांत पांडेय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-2023) के आलोक में त्रिभाषा सूत्र पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने अनेकों उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञानार्जन, चिंतन, अभिव्यक्ति एवं व्यक्तित्व विकास का आधार है।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में भाषा विकास की प्रक्रिया मौखिक एवं लिखित दोनों स्तरों पर सुदृढ़ होनी चाहिए। प्रारंभिक अवस्था में ध्वनियों की पहचान, उच्चारण की शुद्धता तथा फोनेटिक (ध्वन्यात्मक) पद्धति के माध्यम से भाषा शिक्षण अधिक प्रभावी बनता है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा आधारित शिक्षा विद्यार्थियों की समझ, सृजनशीलता एवं आत्मविश्वास को बढ़ाती है, जबकि अन्य भारतीय भाषाओं का अध्ययन राष्ट्रीय एकात्मता और सांस्कृतिक समन्वय को सुदृढ़ करता है।
पांडेय जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2023 में वर्णित भाषा शिक्षण के विविध आयामों—श्रवण, वाचन, भाषण एवं लेखन—पर प्रकाश डालते हुए आचार्यों से विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यालयों में भाषा-संपन्न वातावरण निर्मित करने, कहानी, संवाद, गीत, कविता तथा गतिविधि-आधारित शिक्षण के माध्यम से भाषाई दक्षता बढ़ाने पर विशेष बल दिया। सत्र के अंत में आचार्यों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
इस अवसर पर पूर्णकालिक कार्यकर्ता सतीश कुमार सिंह,रमेश मणि पाठक, गंगा चौधरी, परमेश्वर कुमार, मनमोहन ठाकुर, साकेत कुमार, शंभू कुमार, आलोक कुमार, शशि भूषण मिश्र, ऋचा कुमारी, सुप्रिया कुमारी, वंदना पांडे तथा सभी प्रशिक्षणार्थी आचार्य उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी
शशि भूषण मिश्र।
