डेस्क/बिहार
लोकेशन/भागलपुर
रिपोर्टर/अमित कुमार
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सड़क किनारे रोता मिला 8 माह का मासूम, खाकी ने दिखाई ममता; महिला सिपाहियों ने दूध पिलाकर मां का दिया एहसास
ऐंकर – भागलपुर में एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई, जब आठ माह के मासूम बच्चे को सड़क किनारे झोले में छोड़ दिया गया। लेकिन इसी घटना के बीच खाकी वर्दी में छिपी ममता और इंसानियत की ऐसी तस्वीर भी सामने आई, जिसने लोगों का दिल जीत लिया।
मामला नाथनगर के गुरुकुल स्कूल के समीप का है। सुबह-सुबह एक ई-रिक्शा चालक अपने काम पर जा रहा था। रास्ते में यात्री को उतारने के बाद जब वह वापस लौट रहा था, तभी उसे सड़क किनारे एक झोले से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर चालक ने अपना ई-रिक्शा रोका और झोले के पास पहुंचा। वहां करीब आठ माह का मासूम बच्चा रोता हुआ मिला।
ई-रिक्शा चालक ने बिना देर किए बच्चे को उठाया और मधुसूदनपुर थाना पहुंचकर पुलिस के हवाले कर दिया। मासूम को थाने में देखकर वहां तैनात महिला सिपाहियों का दिल भी पसीज गया। बच्चे के लिए महिला सिपाही सिर्फ पुलिसकर्मी नहीं, बल्कि कुछ देर के लिए उसकी मां बन गईं।
महिला सिपाहियों ने बच्चे को अपनी गोद में लिया, उसे दूध पिलाया और प्यार से दुलारते हुए लोरी सुनाई। मां से दूर मासूम को पुलिस की महिला जवानों की गोद में कुछ पल के लिए ममता का एहसास मिला। थाने का माहौल भी कुछ देर के लिए ऐसा हो गया, मानो वर्दी के बीच मां की ममता उतर आई हो।
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की उस संवेदनशील तस्वीर को सामने रखा, जिसे अक्सर अपराध और कार्रवाई की खबरों के बीच नजरअंदाज कर दिया जाता है। महिला सिपाहियों ने दिखा दिया कि खाकी सिर्फ कानून का पालन कराने वाली वर्दी नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर बेसहारा के लिए सहारा और मासूम के लिए मां की ममता भी बन सकती है।
मधुसूदनपुर थानाध्यक्ष संजय मंडल ने बताया कि बच्चे की मेडिकल जांच कराई गई है। अब आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को बाल संरक्षण विभाग को सौंपने की तैयारी की जा रही है।
सड़क किनारे बेसहारा मिला यह मासूम आखिर किस मजबूरी में वहां छोड़ा गया, यह जांच का विषय है। लेकिन इस कहानी का सबसे भावुक पहलू यही रहा कि जिस मासूम को किसी ने सड़क किनारे अकेला छोड़ दिया, उसे कुछ समय के लिए ही सही, लेकिन खाकी वर्दी में ममता की गोद जरूर मिल गई।
