मस्तूरी। क्षेत्र में इन दिनों बिना किसी अनुमति के अवैध रूप से बोर खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। शासन के कड़े नियमों के बावजूद, रसूखदारों और खनन माफियाओं द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन मौन साधे बैठा है।
भीषण गर्मी से पहले ही जल स्तर गिरने का खतरा
मस्तूरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से आने वाले समय में भीषण जल संकट की स्थिति बन सकती है। नियमानुसार, बोर खनन से पहले राजस्व विभाग और संबंधित पंचायत से अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन यहाँ रात के अंधेरे में और कई जगहों पर तो दिनदहाड़े भी मशीनें चलती देखी जा रही हैं।
नियमों की हो रही अनदेखी
सूत्रों के अनुसार, खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे रिहायशी इलाकों में भी बिना किसी रोक-टोक के बोरिंग गाड़ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को इसकी सूचना होने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश
अवैध खनन से आसपास के कुओं और पुराने बोरवेलों का जल स्तर गिरता जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल हरकत में आए और अवैध रूप से चल रही मशीनों को जब्त कर संबंधित मालिकों पर कड़ी कार्रवाई करे।
”क्या प्रशासन किसी बड़ी मुसीबत का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते इन अवैध बोरवेलों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो पूरा क्षेत्र जल विहीन हो जाएगा।”
संवाददाता- महेंद्र सिंह राय
