समझौता लागू नहीं होने पर राजस्व कर्मचारियों का आंदोलन, 18 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरना

समझौता लागू नहीं होने पर राजस्व कर्मचारियों का आंदोलन, 18 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरना

रिपोर्ट संजीव कुमार शर्मा भागलपुर बिहार

जगदीशपुर में कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर जताया विरोध बिहार के राजस्व कर्मचारियों ने सरकार पर लिखित समझौते और दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। कर्मचारियों के संगठन का कहना है कि 11 फरवरी 2026 से 10 मई 2026 तक चले राज्यव्यापी आंदोलन को 7 मई 2026 को सरकार के साथ हुए लिखित समझौते और आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया था, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समझौते के अनुरूप कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
संघ के अनुसार कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें अब भी लंबित हैं। इनमें सेवा संपुष्टि, एसीपी/एमएसीपी का लाभ, वेतनमान एवं ग्रेड पे से जुड़े वित्तीय लाभ, उपार्जित एवं अग्रिम अवकाश के भुगतान, स्थानांतरण से संबंधित मामलों का निष्पादन प्रमुख हैं। इसके अलावा राजस्व कर्मचारियों का पदनाम बदलकर “सहायक राजस्व अधिकारी” किए जाने, रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति तथा पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी शामिल है।
संघ का कहना है कि विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण एक-एक कर्मचारी से तीन से पांच हल्कों का कार्य कराया जा रहा है। इससे कर्मचारियों को देर रात तक तथा अवकाश के दिनों में भी काम करना पड़ रहा है। संगठन के अनुसार लगातार बढ़ते कार्यभार के कारण कर्मचारियों में मानसिक तनाव, अवसाद, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं, जिसका असर उनके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ रहा है।
राजस्व कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि लिखित समझौते के अनुरूप शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो चरणबद्ध आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आंदोलन का प्रस्तावित कार्यक्रम
11 एवं 13 जुलाई 2026: काली पट्टी बांधकर कार्यों का निष्पादन।
14 जुलाई 2026: सभी जिला मुख्यालयों पर एक दिवसीय धरना।
15 से 17 जुलाई 2026: असहयोग आंदोलन, जिसके तहत केवल ऑफलाइन कार्य एवं उपलब्ध संसाधनों के आधार पर कार्य किया जाएगा।
18 जुलाई 2026 से: पटना में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन।
संघ ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान यदि प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं या राजस्व संबंधी कार्यों में बाधा आती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की होगी। संगठन ने सरकार से पूर्व में हुए समझौते को तत्काल लागू करने और कर्मचारियों की लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।

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