डेस्क/बिहार
लोकेशन/भागलपुर/रिपोर्ट/अमित कुमार
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बीएयू में विश्व नारियल दिवस–2026 के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन
सबौर, भागलपुर।
नारियल विकास बोर्ड, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय, पटना द्वारा भा.कृ.अ.प.-अखिल भारतीय समन्वित रोपण फसल अनुसंधान परियोजना, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर, भागलपुर के सहयोग से विश्व नारियल दिवस समारोह–2026 का भव्य एवं सफल आयोजन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में किया गया। कार्यक्रम में नारियल की वैज्ञानिक खेती, उन्नत उत्पादन तकनीक, मूल्य संवर्धन, विपणन तथा नारियल आधारित आजीविका के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं अधिकारियों तथा नारियल विकास बोर्ड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह दिवस अंतर्राष्ट्रीय नारियल समुदाय (International Coconut Community–ICC) की स्थापना की स्मृति में मनाया जाता है, जिसकी स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी। इस वर्ष विश्व नारियल दिवस का विषय “अनिश्चितता के दौर में नारियल : खाद्य, ऊर्जा और आजीविका की सुरक्षा” रखा गया। थीम के अनुरूप कार्यक्रम में बदलती कृषि परिस्थितियों में नारियल की उपयोगिता तथा किसानों के लिए नारियल को टिकाऊ एवं लाभकारी फसल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के *माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह* ने अपने सन्देश में कहा कि बदलते जलवायु एवं कृषि परिदृश्य में किसानों की आय और आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए कृषि विविधीकरण तथा बहुउपयोगी फसलों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। नारियल ऐसी ही महत्वपूर्ण फसल है, जिसका उपयोग खाद्य, पेय, तेल, औषधीय एवं सौंदर्य प्रसाधन सहित अनेक क्षेत्रों में किया जाता है।
अपने सन्देश में उन्होंने कहा कि नारियल की खेती को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं बेहतर विपणन से जोड़ने की आवश्यकता है। इससे किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित होंगे। माननीय कुलपति ने अपने सन्देश में बिहार में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस प्रकार की फसलों एवं गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर ज़ोर दिया जिनमें किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं रोजगार की व्यापक संभावनाएं हों।
*किसानों को वैज्ञानिक खेती एवं आधुनिक तकनीकों की जानकारी*
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को नारियल की वैज्ञानिक एवं उन्नत खेती, बेहतर उत्पादन तकनीक, पौध संरक्षण, पोषण प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, विपणन तथा नारियल आधारित विभिन्न आजीविका गतिविधियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना रहा। विशेषज्ञों ने किसानों को नारियल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने तथा उपलब्ध तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने की सलाह दी।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को अपनी खेती से जुड़ी समस्याओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखने तथा उनसे सीधे समाधान एवं सुझाव प्राप्त करने का अवसर मिला। इससे किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हुआ तथा किसानों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी जानकारी प्राप्त हुई।
*नारियल विकास बोर्ड की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका*
विश्व नारियल दिवस समारोह के सफल आयोजन में श्रीमती जयश्री ए., निदेशक, नारियल विकास बोर्ड, क्षेत्रीय कार्यालय, पटना के नेतृत्व में नारियल विकास बोर्ड की पूरी टीम का विशेष एवं महत्वपूर्ण योगदान रहा। बोर्ड की टीम एवं डॉ. डी. के. जायसवाल, प्रभारी वैज्ञानिक, भा.कृ.अ.प.-अखिल भारतीय समन्वित रोपण फसल अनुसंधान परियोजना, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर द्वारा कार्यक्रम की योजना एवं समन्वय, किसानों की सहभागिता सुनिश्चित करने, कार्यक्रम से संबंधित व्यवस्थाओं तथा नारियल विकास बोर्ड की विभिन्न योजनाओं एवं तकनीकी गतिविधियों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रभावी प्रयास किए गए।
श्रीमती जयश्री ए. के नेतृत्व में बोर्ड की टीम ने किसानों एवं विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ नारियल की खेती को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड द्वारा किए जा रहे प्रयासों को प्रतिभागियों तक पहुंचाया। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को यह संदेश दिया गया कि नारियल केवल एक फल देने वाली फसल ही नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, रोजगार, मूल्य संवर्धन एवं ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण आधार भी बन सकता है।
डॉ. ए.के. सिंह ने कृषि विविधीकरण पर दिया जोर
कार्यक्रम में विशेष अतिथि डॉ. ए.के. सिंह, निदेशक अनुसंधान, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने किसानों एवं प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने नारियल की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने तथा कृषि विविधीकरण में नारियल की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा उपलब्ध वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग कर उत्पादन एवं आय में वृद्धि करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने नारियल की बहुउपयोगिता को देखते हुए इसके उत्पादन के साथ-साथ नारियल आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन और विपणन की संभावनाओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता बताई। साथ ही नारियल आधारित उद्यमिता एवं रोजगार की संभावनाओं पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने साझा की तकनीकी जानकारी
कार्यक्रम में डॉ. रूबी रानी, एसोसिएट प्रिंसिपल-कम-डीन, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर तथा श्रीमती अनिता कुमारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, भागलपुर ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में किसानों को संबोधित किया।
डॉ. रूबी रानी ने किसानों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नारियल उत्पादन एवं प्रबंधन की जानकारी देते हुए बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को कृषि विश्वविद्यालय एवं वैज्ञानिक संस्थानों से प्राप्त तकनीकी ज्ञान का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
श्रीमती अनिता कुमारी ने कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जा रही तकनीकी जानकारी एवं प्रशिक्षण की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए नारियल की खेती से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने नारियल उत्पादन के साथ-साथ मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
नारियल आधारित उत्पादों एवं नवाचारों की प्रदर्शनी
समारोह के दौरान नारियल आधारित तकनीकों, उत्पादों एवं नवाचारों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों एवं अन्य प्रतिभागियों को नारियल के विभिन्न उपयोगों, मूल्य संवर्धन तथा नारियल से जुड़े उत्पादों के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों ने प्रदर्शनी में विशेष रुचि दिखाई और नारियल आधारित विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
किसानों एवं प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता
कार्यक्रम में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिकों एवं कृषि विज्ञान केंद्र भागलपुर की टीम, नारियल विकास बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय पटना के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा सबौर एवं आसपास के क्षेत्रों से आए किसानों एवं प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद कर नारियल की खेती से संबंधित अपने अनुभव एवं समस्याएं साझा कीं। विशेषज्ञों द्वारा किसानों को उनकी समस्याओं के अनुरूप आवश्यक तकनीकी सुझाव प्रदान किए गए। कार्यक्रम ने किसानों, वैज्ञानिकों और नारियल विकास बोर्ड के बीच बेहतर समन्वय एवं ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक उपयोगी मंच प्रदान किया।
नारियल विकास बोर्ड, क्षेत्रीय कार्यालय, पटना एवं भा.कृ.अ.प.-अखिल भारतीय समन्वित रोपण फसल अनुसंधान परियोजना, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर, भागलपुर के संयुक्त प्रयासों से आयोजित यह समारोह किसानों में नारियल की वैज्ञानिक खेती एवं इसके बहुआयामी उपयोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। नारियल विकास बोर्ड की टीम, बीएयू सबौर, कृषि विज्ञान केंद्र, भागलपुर तथा सभी किसानों एवं प्रतिभागियों के सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता से विश्व नारियल दिवस समारोह–2026 सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
