डेस्क/बिहार
लोकेशन/भागलपुर
रिपोर्ट/अमित कुमार
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अंगिका के लिए तेज होगा आंदोलन डॉक्टर मीता का हुआ नागरिक अभिनंदन।
भागलपुर के होटल भावना में अंगिका के आंदोलन को लेकर डॉ.खेतान ने
गांधी जी की आत्मकथा का अंगिका अनुवाद के लिए डॉ. मीता का किया नागरिक अभिनंदन ।
वरिष्ठ समाजसेवी और पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष डॉ.शंभू दयाल खेतान ने कहा कि अंगिका के मान-सम्मान के लिए तेज जनांदोलन छेड़ना होगा। वे आज एक स्थानीय होटल में अंग प्रदेश में महात्मा गांधी आगमन शताब्दी वर्ष पर युग चेतना फाऊंडेशन, अंग-जन-गण और अंगिका सभा फाउंडेशन की ओर से अंगिका की उपेक्षा को लेकर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में अध्यक्ष पद से बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकारें तब सुनती हैं जब जनता सड़क पर हो। साहित्यकार गण तो 50 साल से मांग कर ही रहे हैं, अब इस आंदोलन को और धारदार बनाना होगा। संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के अध्यक्ष प्रकाश चंद्र गुप्ता ने अंगिका के लिए जन-जन को विशेष कर युवाओं को जोड़ने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि हमें जन-जागरण करना होगा, सिर्फ धरना-प्रदर्शन काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि मंजूषा की तरह अंगिका को भी रोजगार से जोड़ने की पहल करनी होगी। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अमरेंद्र ने कहा कि जो अंगिका बिहार,झारखंड और बंगाल के अंचलों तक फैली हुई है, ऐसी लोकप्रिय भाषा के प्रति सरकार की उदासीनता और उपेक्षा बेहद चिंतनीय है। इस अवसर पर गांधी जी की आत्मकथा का अंगिका में अनुवाद करने के लिए डॉ. मनोज मीता का नागरिक अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर अंग-जन-गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुधीर मंडल ने अंगिका के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एक अभियान चलाकर इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जोड़ने की आवश्यकता बताई साथ ही उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को प्रशिक्षण देकर अंगिका बोलने तथा लिखने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।
कार्यक्रम के संचालन के क्रम में समाजसेवी और पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई की सरकार ने अंगिका से भी कम आबादी वाली जिन चार भाषाओं, मैथिली, बोडो, डोगरी और संथाली को 2004 में अष्टम सूची में शामिल किया, उन सभी भाषाओं के लिए लंबे समय तक आंदोलन हुए तब 8 जनवरी 2004 को अधिसूचना जारी हुई।
इस अवसर पर गांधी जी की आत्मकथा का अंगिका में अनुवाद करने के लिए दिशा ग्रामीण विकास मंच के सचिव डॉ. मनोज मीता का नागरिक अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर डॉ. मनोज मीता ने कहा कि संसार की करीब 100 भाषाओं में गांधी जी की आत्मकथा का अब तक अनुवाद हो चुका है और अब अंगिका संसार की सौ भाषाओं की कतार में खड़ी हो गई है, जिनमें महात्मा गांधी की आत्मकथा का अनुवाद हुआ है।
उपस्थित वक्ताओं ने डॉ. मीता के इस कार्य की काफी प्रशंसा की।
इस अवसर पर युग चेतना फाऊंडेशन के निदेशक शिवनंदन खेतान में कहा कि जब चेतना जगती है तब युग बदलता है। उन्होंने अंगिका विकास के लिए हर संभव प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया। इस अवसर पर समाजसेवी लखन लाल पाठक ने अंगिका से जुड़ी सभी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से एक साथ मिलकर आंदोलन करने तथा आगे बढ़ने की अपील की।
इस अवसर पर प्रो. डॉ. रतन कुमार मंडल ने उपस्थित अतिथियों से एक साथ मिलकर अंगिका के लिए आंदोलन छोड़ने का आह्वान किया और कहा कि ऐसा करने पर ही उचित प्रतिफल मिलेगा। इस अवसर पर शिक्षाविद राजीवकांत मिश्र ने अंगिका को मान-सम्मान दिलाने के लिए हर आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की बात कही। उन्होंने भी सभी लोगों से इसके लिए एक जुट होने की अपील की।
इस अवसर पर इस बार की दिवाली में एक दीया अंगिका के नाम पर जलाने का प्रस्ताव पास किया गया। इस अवसर पर गीतकार राजकुमार ने काव्य पाठ किया। अंग-जन-गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.सुधीर मंडल के धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम का समापन हुआ।
