जिले में दोपहर बाद भी खुले रहेंगे अस्पतालों के ओपीडी कक्ष, इलाज के लिए बढ़ा समय
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सुरक्षित प्रसव, ऑपरेशन और संचारी रोगों के उपचार पर विशेष जोर;
एनसीडी जांच से बीमारी की शुरुआती पहचान और रोकथाम की पहल
नवंबर से फरवरी तक दो पालियों में मिलेगी ओपीडी सेवा,
सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का विस्तार कर आम लोगों के इलाज का खर्च घटाने की कोशिश**
किशनगंज, 01 नवंबर।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन केवल अस्पतालों और चिकित्सकों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से होता है कि जरूरत पड़ने पर आम नागरिक को कितनी आसानी से और कितने समय में उपचार मिलता है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए समय पर चिकित्सा सुविधा जीवनरक्षक साबित होती है। दूसरी ओर, इलाज में देरी और निजी अस्पतालों पर निर्भरता गरीब परिवारों के लिए आर्थिक चुनौती बन जाती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पतालों एवं सदर अस्पतालों में ओपीडी सेवा का समय बढ़ाते हुए दोपहर बाद भी चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। नवंबर से फरवरी तक लागू शीतकालीन समय-सारणी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ सरकारी अस्पतालों को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अब शाम पांच बजे तक मिलेगा चिकित्सकीय परामर्श
डीपीएम डॉ मुनाजिम ने बताया कि जिले में ओपीडी पंजीकरण सुबह 08 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक तथा दूसरी पाली में अपराह्न 02:30 बजे से शाम 04 बजे तक होगा। चिकित्सकीय परामर्श सुबह 09 बजे से दोपहर 02 बजे तक और दूसरी पाली में अपराह्न 03 बजे से शाम 05 बजे तक उपलब्ध रहेगा। रविवार एवं सरकारी छुट्टियों के दिन ओपीडी बंद रहेगी। इस व्यवस्था से दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीजों और सुबह अस्पताल नहीं पहुंच पाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय मिलेगा।
मां और नवजात की सुरक्षा से लेकर बच्चों के स्वस्थ भविष्य तक
जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, एनीमिया की पहचान एवं उपचार, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की निगरानी और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रसव के बाद मां और नवजात की देखभाल, बच्चों का नियमित टीकाकरण तथा बीमार बच्चों के उपचार पर भी जोर है। समय पर जांच और चिकित्सकीय हस्तक्षेप से गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को कम करने में मदद मिलती है।
संचारी रोगों पर नियंत्रण, समय पर जांच और उपचार
सिविल सर्जन ने कहा कि बदलते मौसम में बुखार, मलेरिया, टीबी और अन्य संचारी रोगों की पहचान एवं उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। जांच सुविधाओं को मजबूत करने, मरीजों को समय पर उपचार से जोड़ने और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि संक्रमण को गंभीर रूप लेने से पहले नियंत्रित किया जा सके।
ऑपरेशन सेवाओं का विस्तार, निजी इलाज पर निर्भरता घटाने का प्रयास
डीपीएम ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक शल्य चिकित्सा सेवाओं, विशेषकर प्रसव संबंधी ऑपरेशन और जरूरतमंद मरीजों के उपचार को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकारी व्यवस्था में ही आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने की मजबूरी कम हो।
एनसीडी स्क्रीनिंग से बीमारी से पहले बचाव की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति उपचार के साथ बचाव पर भी केंद्रित है। 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर के संभावित लक्षणों की जांच की जा रही है। इन बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान होने से समय पर उपचार, नियमित निगरानी और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।
गुणवत्तापूर्ण इलाज और आर्थिक राहत प्रशासन की प्राथमिकता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सुरक्षित प्रसव, संचारी रोग नियंत्रण और आवश्यक ऑपरेशन सेवाओं को सुदृढ़ करना प्राथमिकता है। ओपीडी की दूसरी पाली से मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। हमारा प्रयास है कि लोगों को उनके नजदीक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले और आर्थिक कारणों से किसी को इलाज से वंचित न रहना पड़े।जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, बच्चों का टीकाकरण, संचारी रोगों की पहचान, एनसीडी स्क्रीनिंग और उपचार सेवाओं को प्रखंड एवं ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। समय पर जांच और उपचार से बीमारी की गंभीरता के साथ परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम किया जा सकता है।ओपीडी का बढ़ा समय और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पतालों की कार्य अवधि में बदलाव नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यापक कोशिश है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से लेकर गंभीर बीमारियों के उपचार और एनसीडी जांच तक इन प्रयासों का उद्देश्य स्पष्ट है—बीमारी का समय पर पता चले, जरूरतमंद को इलाज मिले और आर्थिक तंगी किसी परिवार के उपचार में बाधा न बने।
