बाल विवाह कराने के आरोप में 9 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज, जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई
ज़की हमदम किशनगंज
किशनगंज, बाल विवाह मुक्त किशनगंज के संकल्प को साकार करने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जन निर्माण केन्द्र की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुल नौ लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि इन लोगों ने संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी नियमों की अवहेलना करते हुए एक नाबालिग बालक का चोरी-छिपे विवाह संपन्न कराया।
जन निर्माण केन्द्र के जिला परियोजना समन्वयक मोहम्मद मुजाहिद आलम ने दोनों प्रकरणों की विस्तृत जांच रिपोर्ट अनुमंडल पदाधिकारी-सह-बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी अनिकेत कुमार को सौंपी। जांच में यह तथ्य सामने आया कि सुखानी थाना क्षेत्र के 16 वर्षीय नाबालिग बालक का अपहरण कर जिरनगच्छ पंचायत की 26 वर्षीय महिला के साथ स्थानीय लोगों और नामित आरोपितों की मिलीभगत से बाल विवाह कराया गया।
जांच के दौरान बालक के शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिनसे उसकी नाबालिग उम्र की पुष्टि हुई। इसके अलावा निकाहनामा और संबंधित व्यक्तियों के बयान भी जांच प्रतिवेदन में शामिल किए गए। रिपोर्ट के आधार पर अनुमंडल पदाधिकारी ने तत्काल संबंधित थाना और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया।
निर्देश के आलोक में सुखानी थाना कांड संख्या 39/26, दिनांक 21 जून 2026 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की प्रासंगिक धाराओं के तहत महिला समेत कुल नौ लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति होने के साथ-साथ गंभीर दंडनीय अपराध भी है। यह नाबालिग बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह में शामिल सभी व्यक्तियों को कानूनन दोषी माना जाता है और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत दो वर्ष तक के कठोर कारावास तथा एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन बाल विवाह मुक्त किशनगंज के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इस तरह की सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
