शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षर बनाना नहीं बल्कि श्रेष्ठ मानव गढ़ना है” — ख्यालीराम।

“शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षर बनाना नहीं बल्कि श्रेष्ठ मानव गढ़ना है” — ख्यालीराम।

रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर बिहार।

आनन्दराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर में आयोजित प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस के द्वितीय सत्र का शुभारंभ माननीय क्षेत्रीय संगठन मंत्री (उ०पू० क्षेत्र) श्री ख्यालीराम जी, क्षेत्रीय शिशु वाटिका संयोजिका श्रीमती मंजू श्रीवास्तव, प्रांतीय शिशु वाटिका मार्गदर्शक श्री वीरेन्द्र कुमार, प्रांतीय शिशु वाटिका संयोजिका श्रीमती अनीता सिन्हा, सुश्री अन्नु कुमारी, जिला निरीक्षक भागलपुर श्री सतीश कुमार सिंह एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सुमंत कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत संगठन मंत्री सहित सभी आगत अतिथियों एव प्रशिक्षणार्थियों ने शिशु वाटिका की 12 व्यवस्थाओं का निरीक्षण एवं अवलोकन किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री ख्यालीराम जी ने कहा कि शिशु वाटिका विद्या भारती का वह प्रथम सोपान है, जहाँ राष्ट्र निर्माण का बीज बोया जाता है। उन्होंने कहा कि शिशु के जीवन के पहले आठ वर्ष उसकी नींव के वर्ष होते हैं, जिसमें दिए गए संस्कार, अनुशासन एवं मातृवत स्नेह ही उसे एक आदर्श नागरिक बनाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि नई शिक्षा नीति भी हमें यही सिखाती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि श्रेष्ठ मानव का निर्माण करना है। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों से आह्वान किया कि वे इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग से प्राप्त अनुभवों को अपनी-अपनी शिशु वाटिकाओं में लागू करें तथा खेल, गीत, कहानी एवं विविध क्रियाकलापों के माध्यम से बच्चों में भारतीयता के भाव का विकास करें।जिला निरीक्षक श्री सतीश कुमार सिंह ने माननीय क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री ख्यालीराम जी को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।

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