विद्यालयों में जीवन रक्षा का संकल्प: लाइफ सपोर्ट सिस्टम की उपयोगिता पर विशेष परिचर्चा की गई।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।
आयोजित प्रशिक्षण वर्ग में जीवन रक्षा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता हेतु लाइफ सपोर्ट सिस्टम की उपयोगिता पर विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश सह मंत्री, भारती शिक्षा समिति एवं शिशु शिक्षा प्रबंध समिति, बिहार डॉ. नन्द किशोर, गयाजी विभाग के विभाग निरीक्षक उमाशंकर पोद्दार तथा बांका विभाग के विभाग निरीक्षक ब्रह्मदेव प्रसाद द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ किया गया।
डॉ. नन्द किशोर ने दो सत्रों में आचार्य एवं दीदीजी को लाइफ सपोर्ट सिस्टम, प्राथमिक उपचार तथा सीपीआर (CPR) की जानकारी देते हुए कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक तकनीकों का ज्ञान प्रत्येक शिक्षक के लिए आवश्यक है। विद्यालयों को शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षा एवं स्वास्थ्य जागरूकता का भी केंद्र बनना चाहिए।
तृतीय सत्र में वीरेंद्र कुमार ने “विद्या भारती शिशु वाटिका की परिकल्पना” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए शिशु के सर्वांगीण विकास, संस्कारयुक्त वातावरण तथा शिशु वाटिका शिक्षा के बारह व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला।
सेवा स्थायित्व वर्ग में लालबाबू प्रसाद यादव ने विद्यालय के संस्कारक्षम वातावरण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यालय का वातावरण ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण का आधार होता है।
अतिथि परिचय का कार्य उमाशंकर पोद्दार,गंगा चौधरी एवं परमेश्वर कुमार ने किया। इस अवसर पर वर्ग के प्रधानाचार्य सतीश कुमार सिंह सहित सभी प्रमुख कार्यकर्ता, आचार्य एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन स्वस्थ, सुरक्षित, संस्कारित एवं जागरूक समाज निर्माण के संकल्प के साथ हुआ।
मीडिया प्रभारी
शशि भूषण मिश्र
