जयरामनगर सहकारी समिति में 19.64 लाख का गबन उजागर, 13 बार में खातों से निकली राशि
बिलासपुर – 21 अप्रैल 2026
सेवा सहकारी समिति मर्यादित जयरामनगर में हुए 19 लाख 64 हजार रुपए के गबन मामले में जांच के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। जांच प्रतिवेदन में समिति के दो खातों—सेविंग खाता क्रमांक 606007042354 और रिवाल्विंग खाता क्रमांक 106003870399—से 13 बार में राशि निकाले जाने की तारीखवार जानकारी सामने आई है।
सेविंग खाते से 5 बार निकासी
जांच के अनुसार 15 दिसंबर 2025 को पहली बार सेविंग खाते से आहरण हुआ। इस दिन 22 माह के लंबित वेतन के नाम पर प्रभारी प्रबंधक संतोष आनंद द्वारा दो बार में 1.76 लाख और 1.54 लाख रुपए निकाले गए।
इसके बाद 22 दिसंबर को डनेज, सूतली व ईंट-भूंसी के नाम पर 2.65 लाख और 30 दिसंबर को भवन मरम्मत व पुट्टी-पोताई के नाम पर 2.70 लाख रुपए निकाले गए।
24 फरवरी 2026 को बिना किसी कार्यवाही के 40 हजार रुपए आहरित किए गए। इस प्रकार इस खाते से कुल 5 बार राशि निकाली गई।
रिवाल्विंग खाते से 8 बार आहरण
रिवाल्विंग खाते से पहली निकासी 30 दिसंबर 2025 को 1.30 लाख रुपए की हुई।
03 जनवरी 2026 को दो बार में 2.80 लाख रुपए अज्ञात खाते में ट्रांसफर और 1.40 लाख रुपए नगद निकाले गए।
31 जनवरी को 1 लाख रुपए, 04 फरवरी को दो बार में 1.40 लाख और 2 लाख रुपए, 24 फरवरी को 43 हजार और 03 मार्च को 26 हजार रुपए निकाले गए।
इस तरह इस खाते से कुल 8 बार में राशि का आहरण किया गया।
13 बार में 19.64 लाख का गबन
दोनों खातों से 15 दिसंबर 2025 से 03 मार्च 2026 के बीच कुल 13 बार में 19.64 लाख रुपए निकाले गए, जिससे गबन की पुष्टि हुई है।
धान परिवहन में शून्य शॉर्टेज, फिर भी भुगतान नहीं
मामले का सबसे बड़ा सवाल यह है कि धान खरीदी प्रभारी विरेन्द्र टंडन द्वारा 69,490 क्विंटल धान की खरीदी कर उसका परिवहन बिना किसी शॉर्टेज के पूरा किया गया। इसके बावजूद उन्हें केवल 1.63 लाख रुपए प्रारंभिक भंडारण व्यय मिला, जबकि बाकी राशि खातों से निकालकर अन्यत्र भुगतान कर दी गई।
जांच अधिकारी की सिफारिश
सहकारिता विस्तार अधिकारी श्रीमती गोधुली वर्मा ने मामले को आर्थिक अपराध मानते हुए 19.64 लाख रुपए की वसूली या एफआईआर दर्ज करने और प्रभारी प्रबंधक संतोष आनंद की तत्काल बर्खास्तगी की अनुशंसा की है।
उप आयुक्त सहकारिता ने 20 अप्रैल 2026 को प्राधिकृत अधिकारी को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश जारी कर दिए हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आर्थिक अनियमितता पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
संवाददाता – महेंद्र सिंह राय
