23 अप्रैल 2026 को जोगसर थाना पुलिस के द्वारा एफआईआर दर्ज करने के उपरांत हिरासत में लेने एवं कोर्ट से छोड़े जाने पर प्रेस वार्ता का आयोजन
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।
भागलपुर : एडवोकेट आलय बनर्जी एवं एक अन्य हाई कोर्ट के अधिवक्ता और वरिष्ठ पत्रकार गौतम सुमन गर्जना, अजय कुमार, संजीव मिश्रा,अरविंद कुमार यादव और मोहम्मद समीउल्लाह के द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में अधिवक्ता आलय बनर्जी ने कहा कि 23 अप्रैल 2026 को सम्मानित पत्रकारों के द्वारा शहर के एक रेस्टोरेंट में चल रहे अनैतिक कार्यों को उजागर करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन से प्राप्त सबूतों को दबाने का प्रयास जोगसर थाना प्रभारी के द्वारा किया गया। रेस्टोरेंट के संदर्भ में संकलन साक्ष्य को दरकिनार कर पत्रकारों पर बेबुनियादी आधार पर थानाध्यक्ष के द्वारा प्राथमिकी दर्ज किया गया। उसके उपरांत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष पांचो पत्रकार को प्रस्तुत किया गया। जहां मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी भागलपुर के द्वारा जांच पड़ताल एवं पूछताछ के बाद साधारण मुचलके पर सभी को मुक्त कर न्यायिक हिरासत में लेने से इनकार कर दिया। आलय बनर्जी ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि माननीय मुख्य न्यायिक अधिकारी द्वारा आईडी प्रूफ की जांच कर और उसकी सत्यता को देखते हुए पुलिस हिरासत से मुक्त करने का आदेश पारित किया गया । वही एसएचओ जोगसर थाना के कहने पर एसएसपी भागलपुर के द्वारा बिना जांच पड़ताल के बिना सत्यापित किए फर्जी कहना और प्रेस में बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं मौके पर मौजूद हाई कोर्ट के अधिवक्ता कुमोद राय ने बयान देते हुए कहा कि जोगसर थाना प्रभारी मंटू कुमार और रेस्टोरेंट संचालक के गठजोड़ से साजिश के तहत पत्रकारों को फंसाया गया,इसकी जितनी भरर्त्सना की जाए बहुत कम है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर जोगसर थानाध्यक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि रेस्टोरेंट संचालक को बचाने के लिए उन्होंने 5 प्रतिष्ठित पत्रकारों को न केवल फंसाया है, बल्कि उन्होंने इन पत्रकारों की मान- सम्मान को समाज में धूमिल करने का कुत्सित काम किया है। उन्होंने कहा कि यह पत्रकारगण निर्दोष हैं। रेस्टोरेंट संचालक को उक्त थाना प्रभारी का संरक्षण प्राप्त है। पत्रकारों की प्रतिष्ठा और बेज्जती की गई और उसका दुष्प्रचार कराया गया यह बहुत ही दुखद है। पत्रकार गौतम सुमन गर्जना ने कहा कि कानून और पुलिस प्रशासन पर उन्हें पूरा भरोसा था लेकिन इस घटना ने उस भरोसे को तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह पुलिस प्रशासन के द्वारा कलमकारों के कलम का कत्ल करने का प्रयास किया गया है, ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। श्री गर्जना ने कहा कि हर छोटे- छोटे मामलों में पीसी कराने वाले वरिय पुलिस अधीक्षक या सिटी एसपी सर ने भी हम पत्रकारों का पक्ष या सच्चाई जानने की कोशिश नहीं की, बस थानाध्यक्ष के कहने पर हम पत्रकारों को फर्जी कह दिया गया। उन्होंने कहा कि 1982 से आरएनआई प्राप्त एक प्रतिष्ठित दैनिक अखबार में वे भागलपुर जिले की खबर लंबे समय से लिखते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे आईकार्ड जांच कर हमारे संपादक सर से पुलिस प्रशासन को पुछना चाहिए था कि हम उनके संवाददाता हैं या नहीं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया जाना इस बात को प्रमाणित करता है कि कहीं न कहीं साजिश और षड्यंत्र रची गयी है। श्री गर्जना ने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि कलमकारों की सहनशीलता को कायरता समझने की भूल कोई न करे, क्योंकि कलम में बड़ी धार होती है। जिस दिन कलमकार अपने बजूद को समझकर लिखने लगेंगे, तो अच्छे- अच्छों की दुकानदारी बंद हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस घटित घटना से वे काफी मर्माहत हुए हैं। उन्होंने माननीय सीजीएम सर की सुझ- बुझ और न्याय को सैल्यूट करते हुए कहा कि उन्होंने हम पांचोंको पत्रकार माना और तत्काल राहत दी। उन्होंने जिला पदाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, आईजी और डीजीपी सहित माननीय मुख्यमंत्री महोदय से इस मामले में संज्ञान लेने का निवेदन किया और कहा कि पूरी तरह जांच कर फर्जी और तथाकथित आरोपों पर समुचित कार्रवाई करें।
वहीं पत्रकार अरविंद यादव ने कहा कि रेस्टोरेंट में बने केबिन और अंधेरे में नाबालिक लड़कियों को बिठाकर पुरुषों के साथ अनैतिक कार्य करवाया जा रहा था, इसकी सुचना पर ही हमलोग स्टींग ऑपरेशन करने के दौरान उसका वीडियो बनाने लगे, क्योंकि हमारा काम है वीडियो बनाना। उन्होंने कहा कि जब हमलोग वीडियो बनाने लगे तो रेस्टोरेंट संचालक हाथ पड़कर विरोध करने लगा और उसके बाद बैठाकर प्रलोभन देने की कोशिश करने लगा। तत्पश्चात संचालक के सूचना पर जोगसर थाना के एसएचओ जब रेस्टोरेंट में आए तो खुद रेस्टोरेंट संचालक ने कहा कि मेरे ऐसे इस थानाक्षेत्र में कई रेस्टोरेंट चल रहे हैं, जहां इस तरह के केबिन बने हुए हैं और अनैतिक कार्य हो रहे हैं । बावजूद इसके जोगसर एसएचओ ने रेस्टोरेंट संचालक की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही उन्होंने हमलोगों की कोई बात ही सुनी। उन्होंने कहा कि हमें तथाकथित और फर्जी बताया गया। जबकि हम जिस चैनल में काम करते हैं आरएनआई से रजिस्टर्ड है। उन्होंने कहा कि इस घटित घटना से वे लोग काफी मर्माहत हैं। उन्होंने खुशी प्रकट करते हुए कहा कि हम पत्रकारों को पुलिस प्रशासन ने फर्जी और तथाकथित बताया, लेकिन न्यायालय ने हमें पत्रकार मान लिया। उन्होंने बताया कि स्टिंग ऑपरेशन करने के दौरान कई लड़कियां वहां केबिन में मौजूद थी और वह कपड़े भी ठीक से नहीं पहनी हुई थी। उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट में चल रहे इस अनैतिक कार्यों को पुलिस के द्वारा दबाया गया और उल्टे हम पत्रकारों पर रंगदारी एवं वसूली का आरोप लगाया गया।उन्होंने कहा कि एक साजिश के तहत हमलोगों को न केवल फंसाया गया है, बल्कि हमें फर्जी भी बताया गया है। उन्होंने कहा कि हम जिला प्रशासन से मांग करते हैं कि जो फर्जी पत्रकार हैं,उन्हें चिन्हित करें और उसे बाहर निकालें। यदि हम भी फर्जी हैं तो हमारी भी जांच हो। उन्होंने कहा कि हम कई वर्षों से राष्ट्रीय चैनल में काम करते आ रहे हैं। अरविंद कुमार ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों और पत्रकारों के द्वारा रेस्टोरेंट संचालक पर दबाव बनाकर उससे देर रात में मुकदमा कराया गया ।यह पूरी तरह से साजिश रच कर हम पांचो पत्रकारों को फंसाया गया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिस तरह के अनैतिक कार्य वहां रेस्टोरेंट में चल रहे थे, उसको हमलोग दिखा नहीं सकते हैं। वह दिखाने के लायक नहीं है,लेकिन जरूरत पड़ने पर वह वरीय प्रशासन को जरूर दिखाएंगे। इस दौरान पत्रकार अजय यादव,संजीव मिश्रा व समीउल्लाह ने भी प्रशासनिक हरकतों पर सवाल उठाया और कहा कि इस मामले में यदि प्रशासन निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करती, तो कई रेस्टोरेंट के कारनामे सामने आते और हमारे भागलपुर की नाबालिग बच्चियाँ अंधेरी केबिन की शिकार होने से बच जाती।
