बीएयू, सबौर में वैज्ञानिक लेखन एवं शोध प्रकाशन रणनीतियों पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार ।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के बिहार कृषि महाविद्यालय के कृषि प्रसार शिक्षा विभाग द्वारा कृषि अर्थशास्त्र विभाग के सहयोग से 22 से 24 जुलाई 2026 तक “प्रभावी वैज्ञानिक लेखन एवं शोध प्रकाशन रणनीतियाँ (Effective Scientific Writing and Research Publication Strategies)” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों में वैज्ञानिक लेखन, शोध संप्रेषण तथा शोध पत्र प्रकाशन संबंधी व्यावहारिक दक्षताओं का विकास करना था।
कार्यशाला का उद्घाटन डॉ. रूबी रानी, एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध तभी सार्थक होता है जब उसे प्रभावी वैज्ञानिक लेखन के माध्यम से प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित किया जाए। इस अवसर पर डॉ. एम. के. वाधवानी, एसोसिएट डीन-सह-प्राचार्य, कॉलेज ऑफ एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट (CABM), सबौर भी उपस्थित रहे तथा उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक लेखन एवं प्रकाशन कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला में कुल 55 स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया। प्रतिभागी विश्वविद्यालय के 12 विभागों—कृषि प्रसार शिक्षा, कृषि अर्थशास्त्र, कृषि सांख्यिकी, सस्य विज्ञान (एग्रोनॉमी), मृदा विज्ञान, पादप रोग विज्ञान, आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन, फल विज्ञान, पुष्प विज्ञान, शाक एवं सब्जी विज्ञान, फसलोत्तर प्रौद्योगिकी तथा कीट विज्ञान से शामिल हुए। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति, सक्रिय सहभागिता तथा विशेषज्ञों से निरंतर संवाद ने उनके शोध लेखन के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाया।
कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिक शोध लेखन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। इनमें वैज्ञानिक लेखन की मूलभूत अवधारणाएँ, शोध पत्र की संरचना (IMRAD), साहित्य समीक्षा एवं संदर्भ प्रबंधन, शोध नैतिकता, प्रभावी सार (Abstract) एवं भूमिका (Introduction) लेखन, कार्यविधि, परिणाम, चर्चा एवं निष्कर्ष लेखन, शोध पत्र तैयार करना, उपयुक्त शोध पत्रिका का चयन एवं पांडुलिपि प्रस्तुत करने की प्रक्रिया, शोध प्रस्ताव, तकनीकी रिपोर्ट एवं नीति संक्षेप (Policy Briefs), शोध प्रस्ताव तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण, मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतीकरण कौशल तथा वैज्ञानिक संपादन, प्रूफरीडिंग एवं भाषा सुधार जैसे विषय शामिल रहे।
कार्यशाला के अंतर्गत बाह्य विशेषज्ञ के रूप में आईसीएआर–केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIRB), हिसार की वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) डॉ. ऐश्वर्या एस. ने “वैज्ञानिक लेखन एवं शोध पत्र तैयार करने” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र तैयार करने तथा उच्च प्रभाव कारक (High Impact Factor) वाली शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन के लिए आवश्यक रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को संपादकों एवं समीक्षकों की अपेक्षाओं तथा शोध पत्र की गुणवत्ता बढ़ाने के व्यावहारिक उपायों से भी अवगत कराया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने सभी तकनीकी सत्रों में उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद स्थापित किया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें शोध पत्र लेखन एवं प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला का आयोजन डॉ. आदित्य सिन्हा के मार्गदर्शन में किया गया, जबकि डॉ. प्रीति प्रियदर्शनी एवं डॉ. नेहा पाण्डेय ने आयोजन सचिव के रूप में तथा कृषि प्रसार शिक्षा विभाग की आयोजन समिति ने इसके सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
