बिहार ब्यूरो एस एन हसनैन
बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित कर समाज में संतुलन, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने के उद्देश्य से किशनगंज जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। आगामी 11 से 31 जुलाई 2025 तक जिले में “जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा” मनाया जाएगा, जिसकी व्यापक तैयारी को लेकर जिला पदाधिकारी विशाल राज की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कन्वर्जेंस बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, और सभी सहयोगी संस्थाओं के अधिकारियों की सहभागिता रही। बैठक का उद्देश्य था — परिवार नियोजन सेवाओं को गाँव-गाँव, घर-घर तक पहुंचाना और सामाजिक सहभागिता के साथ अभियान को जनांदोलन का रूप देना। इस महत्वपूर्ण बैठक में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी, एनसीडीओ डॉ. उर्मिला कुमारी, डीपीएम, डीपीसी, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीएचएम, बीसीएम, सीडीपीओ, एवं सभी सहयोगी संस्थाओं के जिला प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सभी प्रखंडों को मिला स्पष्ट लक्ष्य, प्रतिदिन चलेगा नसबंदी ऑपरेशन
सदर अस्पताल को 70 महिला एवं 10 पुरुष नसबंदी का लक्ष्य
प्रत्येक प्रखंड को 75 महिला एवं 5 पुरुष नसबंदी सुनिश्चित करने का निर्देश
हर दिन कम से कम 15 महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन कराए
पुरुषों की सहभागिता बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास हों
गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को परिवार नियोजन के साधनों से जोड़ा जाए
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने बैठक में कहा की “परिवार नियोजन केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, यह जनसंख्या नियंत्रण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक स्थिरता का आधार है। सभी विभाग मिलकर इस पखवाड़ा को सफल बनाएं। हर आशा दीदी, हर स्वास्थ्य कर्मी अपने क्षेत्र में सक्रिय हो। कोई योग्य दंपति लाभ से वंचित न रहे।”
बैठक में सभी विभागों की सहभागिता – संयुक्त प्रयासों पर बल
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा की “आज आवश्यकता है कि हम पुरुषों को भी परिवार नियोजन की जिम्मेदारी में भागीदार बनाएं। नसबंदी शिविर नियमित चलें, प्रचार-प्रसार मजबूत हो और साधन हर जरूरतमंद तक पहुंचें — यही हमारा लक्ष्य है।”
जिला प्रशासन की जनता से अपील: अब संकोच नहीं, समझदारी की जरूरत है
बैठक में जिला पदाधिकारी विशाल राज ने आम नागरिकों से अपील करता हुए कहा कि परिवार नियोजन को अपनाएं और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करें, अपनी आशा दीदी या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से जानकारी प्राप्त करें, नसबंदी और अन्य साधनों को लेकर फैली भ्रांतियों से ऊपर उठें, पुरुष स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी निभाएं, यह साझी भागीदारी का समय है, अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा, पोषण और सुरक्षा देने के लिए छोटा परिवार अपनाएं
क्यों ज़रूरी है जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा?
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया की महिलाओं का स्वास्थ्य: बार-बार गर्भधारण से महिलाओं के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बच्चों की परवरिश: सीमित बच्चे होंगे तो उन्हें बेहतर शिक्षा, पोषण और देखभाल मिल पाएगी। आर्थिक स्थिरता: छोटा परिवार साधनों पर दबाव नहीं डालता, जीवन गुणवत्ता बेहतर होती है। सामाजिक संतुलन: सीमित जनसंख्या से समाज में असमानता और संसाधनों की लड़ाई कम होती है।इसके लिए जिले में व्यापक रूप से गांवों में प्रचार वाहन, पोस्टर-बैनर व चौपाल संवाद के ज़रिए जानकारी डी जा रही है वही आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देकर सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन काउंटर की सक्रियता के साथ मीडिया और स्थानीय समुदायों की सहभागिता को बढ़ावा दिया जा रहा है |
स्वास्थ्य, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ता किशनगंज
जिलाधिकारी ने कहा कि परिवार नियोजन के स्थायी साधनों को अपनाने हेतु जागरूकता अभियान की अहम भूमिका है। उन्होंने सभी स्वास्थ्य कर्मियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि ग्राम स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक लगातार प्रचार-प्रसार और परामर्श सत्र चलाए जाएं, ताकि समुदाय में इसकी स्वीकार्यता बढ़े और लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित हो।उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि परिवार नियोजन अब सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। इस पखवाड़ा को सिर्फ एक कार्यक्रम न समझा जाए, बल्कि यह हर नागरिक के बेहतर भविष्य का अभियान है।आइए, इस पखवाड़ा में हम सब जुड़ें — क्योंकि स्वस्थ परिवार ही खुशहाल समाज की बुनियाद है।
