इंसानियत की मिसाल बना इंक़लाब फाउंडेशन, दुर्लभ A-नेगेटिव रक्तदान से बची एक और ज़िंदगी

ताज़ा पत्रिका ठाकुरगंज / सिलीगुड़ी।जब मानवता संकट में होती है, तब कुछ लोग अपने निस्वार्थ कर्मों से उम्मीद की नई रोशनी जगा देते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण एक बार फिर इंक़लाब फाउंडेशन, ठाकुरगंज की ओर से सामने आया है, जहाँ दुर्लभ A-नेगेटिव रक्तदान के माध्यम से एक महिला की जान बचाई गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कनकपुर निवासी तर्जुमा खातून की तबीयत अचानक गंभीर हो गई, जिसके बाद उन्हें सिलीगुड़ी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि मरीज को तत्काल अत्यंत दुर्लभ A-नेगेटिव रक्त की आवश्यकता है। परिजनों के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक थी और समय के साथ मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं।

इसी बीच परिजनों ने इंक़लाब फाउंडेशन से संपर्क किया। सूचना मिलते ही संगठन ने बिना किसी देरी के अपने नेटवर्क को सक्रिय किया। मानवता की इस पुकार पर फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य एवं जिला परिषद प्रत्याशी गुलाम जिलानी (क्षेत्र संख्या–17, किशनगंज) ने तुरंत सिलीगुड़ी पहुँचकर रक्तदान किया। उनके इस त्वरित और निस्वार्थ कदम से मरीज को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका और एक अनमोल जीवन बचाया जा सका।

इस सेवा कार्य के दौरान इंक़लाब फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य अजहर रब्बी मीजान रब्बानी भी उपस्थित रहे और पूरी प्रक्रिया में सहयोग प्रदान किया।

इस मानवीय प्रयास ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि इंक़लाब फाउंडेशन केवल एक सामाजिक संगठन नहीं, बल्कि ज़रूरतमंदों के लिए हर समय खड़ा रहने वाला एक मजबूत सामाजिक आधार है। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026 में इंक़लाब फाउंडेशन अपने पाँच वर्ष पूरे करने जा रहा है। इन पाँच वर्षों में संगठन से जुड़े 300 से अधिक युवाओं ने निस्वार्थ भाव से रक्तदान कर सैकड़ों ज़िंदगियों को नया जीवन दिया है।

फाउंडेशन की युवा टीम लगातार अस्पतालों तक पहुँचकर जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था करती आ रही है, जो क्षेत्र में एक मिसाल बन चुकी है। पदाधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि पाँच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्ष 2026 में ठाकुरगंज की धरती पर एक भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें सामाजिक सेवा, युवा सहभागिता और मानवता के मूल्यों को केंद्र में रखा जाएगा।

इंक़लाब फाउंडेशन के इस निःस्वार्थ कार्य की स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने मुक्त कंठ से सराहना की है और इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया है।

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