आनंदराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर में स्वामी विवेकानंद जयंती सह राष्ट्रीय युवा दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया

रिपोर्ट: अमित कुमार भागलपुर, बिहार

भागलपुर। आनंदराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर में स्वामी विवेकानंद जयंती सह राष्ट्रीय युवा दिवस का आयोजन हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यालय परिसर स्वामी विवेकानंद के विचारों और युवाओं के उत्साह से ओत-प्रोत दिखाई दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री सुमंत कुमार, उप-प्रधानाचार्य श्री अशोक कुमार मिश्र एवं कार्यक्रम प्रमुख श्रीमती श्वेता झा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण कर किया गया

इस अवसर पर कक्षा एकादश के भैया तेजस राज, कुमार शौर्य तथा आचार्य शैलेन्द्र कुमार तिवारी ने स्वामी विवेकानंद जयंती की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उनके जीवन से जुड़े अनेक प्रेरक प्रसंगों की विस्तारपूर्वक चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का संपूर्ण जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम के दौरान ममता झा द्वारा प्रस्तुत स्वामी विवेकानंद जयंती पर आधारित गीत—
“जिनके ओजस्वी वचनों से गूंज उठा था विश्व गगन,
वही प्रेरणा पुंज हमारे स्वामी विवेकानंद”
ने उपस्थित सभी श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया और कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की।

प्रधानाचार्य श्री सुमंत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर हम सभी को उनके जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेनी चाहिए। स्वामीजी ने युवाओं को आत्मविश्वास, साहस और सेवा-भाव के साथ जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया तथा विद्यालय के भैया-बहनों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

उप-प्रधानाचार्य श्री अशोक कुमार मिश्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक संत ही नहीं, बल्कि युगद्रष्टा विचारक थे। उनके विचारों में युवाओं को आगे बढ़ाने की अपार शक्ति है। यदि विद्यार्थी उनके बताए मार्ग पर चलें, तो वे न केवल अपने जीवन को सफल बना सकते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी नई दिशा दे सकते हैं।

कार्यक्रम का मंच संचालन श्रीमती श्वेता झा ने किया। इस अवसर पर मीडिया प्रभारी श्री भीष्म मोहन झा के साथ तरुण वर्ग, किशोर वर्ग के भैया-बहन एवं आचार्य/दीदी जी उपस्थित रहे।

 

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