_डेस्क/बिहार
लोकेशन/भागलपुर
रिपोर्ट/अमित कुमार
9798944840
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में प्लांट फिजियोलॉजी उपकरणों पर एक दिवसीय कार्यशाला-सह-व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित*_
माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के मार्गदर्शन में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के प्लांट फिजियोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री विभाग द्वारा “प्लांट फिजियोलॉजी उपकरणों पर एक दिवसीय कार्यशाला-सह-व्यावहारिक प्रशिक्षण” का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को आधुनिक प्लांट फिजियोलॉजी उपकरणों की कार्यप्रणाली, उनके सिद्धांत तथा अनुसंधान में उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी देना था। यह कार्यशाला 29 सितंबर 2026 को प्रातः 9:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक प्लांट फिजियोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री विभाग, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के पीजी लैब-2 में आयोजित की गई। कार्यशाला में बिहार कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें प्लांट फिजियोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री, प्लांट ब्रीडिंग, एग्रोनॉमी, मृदा विज्ञान, उद्यानिकी (फल विज्ञान), उद्यानिकी (सब्जी विज्ञान), उद्यानिकी (फ्लोरीकल्चर एवं लैंडस्केपिंग), पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी, सीएबीटी, बायोटेक्नोलॉजी सहित अन्य विभागों के प्रतिभागी शामिल रहे। विभिन्न विषयों से जुड़े प्रतिभागियों की भागीदारी से कार्यशाला को बहुविषयक स्वरूप मिला। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कार्यशाला के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि अनुसंधान में पौधों की शारीरिक क्रियाओं एवं उनसे संबंधित विभिन्न मापदंडों का सटीक अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों की कार्यप्रणाली एवं उनके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकी जानकारी को अपने शोध एवं शिक्षण कार्यों में उपयोग करने का आह्वान किया। आयोजन सचिव डॉ. सरिता नाहकपाम ने कार्यशाला का परिचय प्रस्तुत किया तथा प्लांट फिजियोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री विभाग के अध्यक्ष एवं कन्वेनर डॉ. आर. डी. रंजन ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। ग्रीन स्पेक्ट्रम टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की विशेषज्ञ टीम के श्री रविशंकर, डॉ. डी. ईश्वर राव एवं श्री कौशिक झा ने प्रतिभागियों को विभिन्न आधुनिक प्लांट फिजियोलॉजी उपकरणों के संचालन एवं उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने उपकरणों की कार्यप्रणाली, उनके मूल सिद्धांत, नमूना लेने की प्रक्रिया, रीडिंग प्राप्त करने तथा प्राप्त आंकड़ों के वैज्ञानिक अनुसंधान में उपयोग की जानकारी सरल एवं व्यावहारिक तरीके से प्रदान की। प्रशिक्षण के दौरान पैम फ्लोरोमीटर के माध्यम से क्लोरोफिल फ्लोरेसेंस एवं फोटोसिस्टम-द्वितीय की कार्यक्षमता, क्लोरोफिल फ्लोरेसेंस इमेजिंग प्रणाली द्वारा पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण संबंधी प्रतिक्रियाओं, फोटोसिंथेसिस यील्ड एनालाइजर द्वारा प्रकाश संश्लेषण की क्षमता तथा पी-700 एवं क्लोरोफिल फ्लोरेसेंस प्रणाली द्वारा फोटोसिस्टम-प्रथम एवं फोटोसिस्टम-द्वितीय की गतिविधियों तथा इलेक्ट्रॉन परिवहन की प्रक्रिया के अध्ययन की जानकारी दी गई। लीफ स्टेट एनालाइजर के माध्यम से पत्तियों एवं फलों में क्लोरोफिल, फ्लेवोनॉल, एन्थोसाइनिन, कैरोटेनॉयड एवं नाइट्रोजन जैसे मापदंडों के त्वरित एवं गैर-विनाशी आकलन की जानकारी दी गई। एनडीवीआई एवं क्लोरोफिल मीटर के माध्यम से पौधों की हरितिमा एवं स्वास्थ्य के आकलन, टीडीआर सॉयल मॉइस्चर मीटर से मृदा नमी के मापन तथा वायरलेस पीएच, ईसी एवं ओआरपी प्रोब से पीएच, विद्युत चालकता एवं ऑक्सीकरण-अपचयन विभव के मापन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्लांट वाटर पोटेंशियल सिस्टम के माध्यम से पौधों की जल स्थिति एवं जल तनाव के अध्ययन, पोर्टेबल एनआईआर एनालाइजर द्वारा विभिन्न गुणवत्ता संबंधी मापदंडों के त्वरित एवं गैर-विनाशी आकलन तथा मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरा द्वारा पौधों की वृद्धि, तनाव एवं वनस्पति सूचकांकों के अध्ययन की जानकारी दी गई। स्वचालित मौसम स्टेशन के माध्यम से तापमान, आर्द्रता, हवा की गति एवं दिशा, वर्षा, सौर विकिरण, पीएआर तथा मृदा नमी जैसे पर्यावरणीय मापदंडों की निगरानी की जानकारी भी दी गई। कार्यशाला में प्रतिभागियों को केवल उपकरणों का प्रदर्शन ही नहीं कराया गया, बल्कि उनके संचालन, नमूना लेने, रीडिंग प्राप्त करने तथा प्राप्त आंकड़ों को अनुसंधान में उपयोग करने की व्यावहारिक जानकारी भी दी गई। इससे प्रतिभागियों को उपकरणों के सिद्धांत और उनके वास्तविक उपयोग के बीच संबंध समझने का अवसर मिला।
माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण आवश्यक है। विभिन्न विभागों के वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों को एक साथ इस प्रकार का प्रशिक्षण देने से अंतर्विषयक अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा तथा आधुनिक उपकरणों से प्राप्त सटीक आंकड़े कृषि अनुसंधान की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में सहायक होंगे।
कार्यशाला के आयोजन एवं सफल संचालन में प्लांट फिजियोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री विभाग के सभी वैज्ञानिकों एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभागीय टीम ने प्रतिभागियों के पंजीकरण, प्रशिक्षण व्यवस्था, उपकरणों के प्रदर्शन, व्यावहारिक सत्र, तकनीकी सहयोग तथा कार्यक्रम के सुचारु संचालन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। कार्यशाला के दौरान प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उपकरणों की कार्यप्रणाली, रीडिंग, उपयोग एवं अनुसंधान में उनकी उपयोगिता से संबंधित प्रश्न पूछे तथा विशेषज्ञ टीम द्वारा उनके प्रश्नों का समाधान किया गया। इस अवसर पर विजेताओं को प्रशंसा उपहार प्रदान किए गए। कार्यक्रम के समापन अवसर पर रिसोर्स पर्सन्स का अभिनंदन किया गया तथा प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। अंत में सह-कन्वेनर डॉ. अवधेश कुमार पाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। मंच संचालन डॉ सुदेशना दास ने किया। कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न विभागों के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को आधुनिक प्लांट फिजियोलॉजी उपकरणों के सिद्धांत एवं व्यावहारिक उपयोग को समझने का अवसर मिला। कार्यशाला ने वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से सटीक आंकड़े प्राप्त करने तथा बहुविषयक एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि अनुसंधान को मजबूत करने की दिशा में उपयोगी योगदान दिया।
