सांसों पर डाका, फसलों पर कालिख’: कर्रा में कोयले की धूल निगल रही जिंदगियां, अब विस्तार की तैयारी
गतौरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रही राधा बाई हर 5 मिनट में साड़ी के पल्लू से मुंह ढंकती हैं। प्लेटफॉर्म पर जमी काली डस्ट हवा के साथ फेफड़ों में उतर रही है। 200 मीटर दूर जेके कॉलेज में 12वीं की छात्रा अंजलि की सफेद ड्रेस शाम तक स्लेटी हो जाती है। ये कहानी सिर्फ राधा या अंजलि की नहीं — कर्रा, लिमतरा, गतौरा, फरहदा के हर घर की है। और अब इसी ‘काली हवा’ के बीच हिन्द एनर्जी अपने कोल वाशरी प्लांट का विस्तार करने जा रही है। वो भी ‘चोरी-छिपे’ जनसुनवाई के साथ।
बॉक्स: एक नजर में दर्द
• रेलवे स्टेशन: पटरियां काली, यात्री परेशान • कॉलेज: क्लास में डस्ट, छात्रों को सांस-आंख की बीमारी • खेत: 40% तक पैदावार घटी, सब्जी-धान पर डस्ट की परत • घर: दमा-टीबी के मरीज बढ़े, बच्चे सबसे ज्यादा शिकार
‘हमें पता ही नहीं कब है सुनवाई’
ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर है कि विस्तार के लिए जरूरी जनसुनवाई को ‘खानापूर्ति’ बनाया जा रहा है। “पंचायत भवन पर एक कागज चिपका दिया। कौन पढ़ने जाता है रोज वहां?” लिमतरा के किसान सुखराम ने कहा। प्लांट में काम करने वाले मजदूर भी अनजान हैं — “साहब बोलते हैं सुनवाई होगी, पर डेट किसी को नहीं पता।”
महिलाओं ने संभाला मोर्चा
फरहदा की सरपंच प्रतिनिधि सुनीता बाई कहती हैं, “बच्चों को स्कूल भेजते डर लगता है। कपड़े धो-धोकर थक गए। अब और बर्दाश्त नहीं।” महिलाओं ने तय किया है — अगर बिना बताए सुनवाई हुई तो प्लांट के गेट पर धरना देंगी।
संवाददाता – महेंद्र सिंह राय
