प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग -2026
उद्घाटन सत्र मनाया गया।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।
आतिथ्य:- आनन्दराम ढांढनियाँ सरस्वती विद्या मंदिर, भागलपुर
भागलपुर में पांच दिवसीय प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग के प्रथम दिवस के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मुंगेर जिला निरीक्षक वीरेंद्र कुमार ,भागलपुर जिला निरीक्षक सतीश कुमार, टीएनबी महाविद्यालय के लेक्चर डॉक्टर रिचा तोमर , शिशु वाटिका प्रशिक्षक अन्नु कुमारी, प्रांतीय संयोजक अनीता सिंन्हा, शिशु वाटिका सह प्रांतीय संयोजक अनामिका स्वराज, मातृ भारती के अध्यक्ष मधु प्रिया मंडल एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य सुमंत कुमार जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। आगत अतिथियों का स्वागत अंग वस्त्र एवं पुष्प गुच्छ भेंट कर किया गया। भैया दिव्यांश श्रीवास्तव के द्वारा विद्या भारती के लक्ष्य को प्रस्तुत किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य सुमंत कुमार ने आगत अतिथियों का परिचय एवं सम्मान किया। मुंगेर जिला निरीक्षक एवं शिशु वाटिका मार्गदर्शक ने प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग के प्रस्तावना को प्रस्तुत किया । मुख्य अतिथि एवं सहायक प्राध्यापक टीएनबी कॉलेज ,भागलपुर कि सुश्री रिचा तोमर जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए शिशु वाटिका के प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। शिशु वाटिका का यह प्रशिक्षण वर्ग हमारे आचार्यों को 3 से 8 वर्ष तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास की बुनियाद को समझने का अवसर देगा। खेल, कहानी और गतिविधि आधारित शिक्षण से ही हम बच्चों में संस्कार, रचनात्मकता और जिज्ञासा का बीजारोपण कर सकते हैं। यह वर्ग विद्या भारती के ‘पंचमुखी विकास’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।”विरेन्द्र कुमार जी ने कहा कि “शिशु वाटिका केवल अक्षर ज्ञान का केंद्र नहीं है, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की प्रथम पाठशाला है। यहाँ से मिलने वाले संस्कार ही उनके जीवन की नींव रखते हैं। विद्या भारती द्वारा संचालित यह प्रशिक्षण वर्ग हमारे आचार्यों को ‘खेल-खेल में शिक्षा’ की पद्धति से जोड़ेगा, जिससे हम हर भैया-बहन तक मातृवत स्नेह और भारतीय मूल्यों को पहुँचा सकें। मैं सभी प्रतिभागी आचार्यों से आग्रह करता हूँ कि इन पाँच दिनों में सीखी गई बातों को अपनी शिशु वाटिकाओं में आत्मसात करें, ताकि हमारा ‘पंचकोशीय विकास’ का लक्ष्य पूर्ण हो सके।”मातृ भारती अध्यक्ष श्रीमती मधु प्रिया मंडल ने कहा कि “शिशु वाटिका माँ की गोद के समान है जहाँ बच्चा पहला संस्कार ग्रहण करता है। इस अवस्था में आचार्या का दायित्व केवल शिक्षिका का नहीं, बल्कि माँ का होता है। मातृ भारती का संकल्प है कि हर शिशु वाटिका में भारतीय परंपरा, संगीत, कहानी और मातृभाषा के माध्यम से बच्चों का भावनात्मक और सांस्कृतिक विकास हो। यह प्रशिक्षण वर्ग हमारी बहनों को और अधिक सक्षम बनाएगा, ताकि वे हर भैया-बहन को संस्कार, सुरक्षा और स्नेह दे सकें। हम सभी मिलकर राष्ट्र के भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं।”भागलपुर जिला निरीक्षक श्रीमान सतीश कुमार सिंह जी ने सभी प्रशिक्षणार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
