पुराने रोस्टर पर चल रहा नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल, डॉक्टरों की कमी और गायनो सेवा बदहाल — भ्रष्टाचार के आरोप तेज।

पुराने रोस्टर पर चल रहा नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल, डॉक्टरों की कमी और गायनो सेवा बदहाल — भ्रष्टाचार के आरोप तेज।

रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।

नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। अस्पताल में 7 जुलाई 2025 को तैयार किया गया ड्यूटी रोस्टर अब तक 19 अप्रैल 2026 तक लागू बताया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक लापरवाही और अनियमितता की स्थिति स्पष्ट हो रही है। इतने लंबे समय तक रोस्टर में बदलाव नहीं होना अपने आप में कई संदेह पैदा करता है।

अस्पताल में लगभग 20 से 21 चिकित्सकों की पदस्थापना होने के बावजूद हकीकत यह है कि रोजाना ड्यूटी पर मात्र 4 से 5 डॉक्टर ही नजर आते हैं। अधिकांश चिकित्सकों की अनुपस्थिति से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि कुछ डॉक्टर केवल एक-दो दिन ड्यूटी कर पूरे महीने की हाजिरी बना लेते हैं और वेतन का लाभ उठा रहे हैं। इसको लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और अस्पताल में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठने लगे हैं।

महिला स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और भी चिंताजनक है। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनो) की पोस्टिंग होने के बावजूद ड्यूटी में केवल एक ही डॉक्टर दिखाई देते हैं, जबकि रात्रि के समय उनकी अनुपस्थिति की शिकायत लगातार मिल रही है। ऐसे में प्रसव समेत अन्य गंभीर मामलों में महिला मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा नहीं मिल पाती।

रात के समय अस्पताल की पूरी जिम्मेदारी जीएनएम (जनरल नर्स मिडवाइफ) और ममता कर्मियों के कंधों पर आ जाती है। सीमित संसाधनों और अधिकारों के बावजूद ये कर्मी मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं, लेकिन बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के जटिल मामलों को संभालना उनके लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है। इससे मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अस्पताल में पर्याप्त संख्या में डॉक्टर तैनात हैं, तो फिर वे ड्यूटी पर क्यों नहीं दिखते। आखिर किसके संरक्षण में यह व्यवस्था चल रही है, जहां चिकित्सक अनुपस्थित रहते हैं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। अस्पताल प्रशासन की चुप्पी भी इस पूरे मामले को और संदिग्ध बना रही है।

मरीजों और उनके परिजनों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सरकारी अस्पताल में इस तरह की लापरवाही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर असर डाल रही है।

लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ड्यूटी रोस्टर को पारदर्शी बनाया जाए और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। साथ ही, दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम लोगों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा मिल सके।

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