बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा का स्वागत, जगदीशपुर में परिचर्चा

बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस की घोषणा का स्वागत, जगदीशपुर में परिचर्चा

रिपोर्ट संजीव कुमार शर्मा भागलपुर बिहार

भागलपुर। बाल विवाह के खिलाफ जमीनी स्तर पर अभियान चला रहे मुक्ति निकेतन भागलपुर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किए जाने का स्वागत किया है। संस्था ने इसे बाल विवाह के खिलाफ भारत में चल रहे अभियान और नागरिक समाज संगठनों के प्रयासों को मिली वैश्विक मान्यता बताया। मुक्ति निकेतन भागलपुर, बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है।
भारत से उठी आवाज बनी वैश्विक संकल्प : चिरंजीवी सिंह
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुक्ति निकेतन भागलपुर के निदेशक चिरंजीवी सिंह ने कहा कि भारत से उठी बाल विवाह के खिलाफ आवाज अब पूरी दुनिया का संकल्प बन गई है। 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में चुना जाना भारत के लिए गर्व का विषय है। इसी तारीख को वर्ष 2024 में भारत सरकार ने नागरिक समाज संगठनों के सहयोग से ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की घोषणा के बाद जिम्मेदारी और बढ़ गई है। लक्ष्य केवल दिवस मनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक बच्चे को बाल विवाह मुक्त बचपन उपलब्ध कराना होगा। जब तक किसी गांव में एक भी बच्चा बाल विवाह के खतरे में है, तब तक अभियान अधूरा है।
चिरंजीवी सिंह ने बताया कि भागलपुर जिले में सरकार और प्रशासन के सहयोग से कानूनी हस्तक्षेप के माध्यम से 363 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। स्कूलों, पंचायतों और गांवों में जागरूकता अभियान चलाने के साथ लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई। आर्थिक रूप से कमजोर और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों का दोबारा स्कूल में दाखिला कराने की दिशा में भी काम किया गया है।
धर्मगुरुओं और शिक्षकों को जोड़ा
उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ मुहिम को जन आंदोलन का रूप देने के लिए धर्मगुरुओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों और समुदाय के लोगों को जोड़ा गया है। केवल कानून के सहारे बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करना संभव नहीं है। इसके लिए सामाजिक सोच में बदलाव और सामुदायिक भागीदारी जरूरी है।
जगदीशपुर में हुई परिचर्चा
बाल विवाह की रोकथाम में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर जगदीशपुर प्रखंड में परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय को जरूरी बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के साथ बाल विवाह की सूचना मिलने पर समय रहते हस्तक्षेप करना आवश्यक है।
परिचर्चा में पंचायती राज पदाधिकारी प्रियांशु राज, प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि अजय कुमार मंडल, उप प्रमुख मोती लाल, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ललन प्रसाद राय, सदस्य अर्पणा कुमारी व पंकज कुमार पांडे, जगदीशपुर मुखिया प्रतिनिधि घनश्याम मंडल, भवानीपुर मुखिया अनुरुद्ध महतो, बैजनी मुखिया नवल किशोर सिंह, सेनो मुखिया भैरो यादव सहित मुक्ति निकेतन भागलपुर के जिला समन्वयक कृष्ण कुमार, प्रखंड समन्वयक नवल किशोर, शशि कुमार, सीएसडब्ल्यू बिपिन कुमार, हेमा कुमारी, सोमेश कुमार, बिनीता झा और स्वीटी प्रिया मौजूद रहीं।
जेआरसी ने शुरू की थी पहल
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए अलग अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की पहल की थी। मार्च 2026 में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करने की आवश्यकता उठाई। सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी डॉ. फातिमा मादा बायो ने भी इस पहल का समर्थन किया।
इसके बाद सिएरा लियोन ने भारत समेत करीब 50 देशों के समर्थन वाला प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया। प्रस्ताव में 27 नवंबर को बाल विवाह समाप्त करने के लिए समर्पित वैश्विक दिवस घोषित करने की मांग की गई थी। 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र ने प्रस्ताव पारित कर दिया।
782 जिलों में अभियान
जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ भारत के सभी 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है। संगठन के अनुसार, सरकार और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से समुदायों, स्कूलों, पंचायतों, आदिवासी एवं वंचित समुदायों, महिलाओं, पुलिसकर्मियों, धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ा गया है। संगठन का दावा है कि उसके सहयोगी संगठनों ने देश में 5.50 लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं।
बाल विवाह की दर में गिरावट
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-21) के अनुसार भारत में 18 वर्ष की उम्र से पहले शादी करने वाली लड़कियों का अनुपात 23.3 प्रतिशत था। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (2023-24) में यह आंकड़ा घटकर 20.1 प्रतिशत हो गया। भारत सरकार ने वर्ष 2026 तक बाल विवाह की दर को 10 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा है।
बाल विवाह को समाप्त करना संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-5 के लक्ष्य 5.3 का भी हिस्सा है। इसमें बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह जैसी हानिकारक प्रथाओं को समाप्त करने की प्रतिबद्धता है। स्थानीय स्तर पर प्रशासन, पंचायत, विद्यालय और सामाजिक संगठनों की साझेदारी को इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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