डेस्क बिहार भागलपुर
29-10-2026
रिपोर्ट संजीव कुमार शर्मा
भागलपुर बिहार
किताबों का बस्ता लेकर मौत से जूझते निकलते हैं छोटे छोटे बच्चे कहीं तेज रफ्तार गाड़ियों का डर, तो कहीं गंगा में समाने का खतरा
भागलपुर जख्म ऐसा है, जिसे हर जर्रा-जर्रा महसूस कर रहा है… ख्वाहिश थी बच्चों का भविष्य मजबूत करने की, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि उनके कदमों को ही सुरक्षित रास्ता नसीब नहीं जिन नन्हे हाथों में किताबें होनी चाहिए, जिन आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने होने चाहिए, उन्हीं बच्चों की जिंदगी आज हर कदम पर खतरे से जूझ रही है यह दर्दनाक तस्वीर भागलपुर के सबौर प्रखंड की मामलखा पंचायत के पुरानी रामनगर गांव की है, जहां गंगा का कटाव सिर्फ जमीन और मकानों को ही नहीं निगल रहा, बल्कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर भी संकट बनकर मंडरा रहा है गंगा की तेज लहरों ने गांव के कई पक्के मकानों और उपजाऊ खेतों को अपने आगोश में ले लिया कटाव रोकने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये से अधिक खर्च कर कटावरोधी कार्य भी कराए, लेकिन हालात नहीं सुधरे। अब गांव का सरकारी विद्यालय भी कटाव के मुहाने पर पहुंच गया, जिसके कारण बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल बंद करना पड़ा स्कूल बंद होने का सबसे बड़ा खामियाजा वहां के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें दूसरे गांव के स्कूल तक पैदल जाना पड़ता है। रास्ते में नेशनल हाईवे पड़ता है, जहां तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच हर पल यह डर सताता है कि कहीं कोई वाहन उन्हें टक्कर न मार दे छोटे-छोटे बच्चे सहमे कदमों से सड़क पार करते हैं और फिर अपनी मंजिल की ओर बढ़ जाते हैं
मुसीबत यहीं खत्म नहीं होती घर लौटते समय कटाव से जर्जर हो चुका बांध और कच्चा रास्ता उनके लिए एक और खतरा बन जाता है फिसलन भरे और टूटे रास्ते पर चलते हुए बच्चों को डर रहता है कि कहीं उनका पैर फिसल न जाए और वे नदी में न गिर पड़ें शिक्षा की नींव मजबूत करने निकले इन नौनिहालों के लिए हर दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है ग्रामीण वर्षों से मजबूत रिंग बांध और ठोस कटावरोधी उपायों की मांग कर रहे हैं सवाल यह है कि आखिर कब तक बच्चे डर के साये में स्कूल जाने को मजबूर रहेंगे क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या इन मासूमों की सुरक्षा के लिए समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे
