48 दिनों बाद लहरनिया नदी किनारे मिला युवक का कंकाल, पत्नी ने आरोपियों को फांसी देने की उठाई मांग

डेस्क बिहार भागलपुर
3-10-2026
रिपोर्ट संजीव कुमार शर्मा
भागलपुर बिहार

48 दिनों बाद लहरनिया नदी किनारे मिला युवक का कंकाल, पत्नी ने आरोपियों को फांसी देने की उठाई मांग

बांका जिले के चांदन प्रखंड अंतर्गत आनंदपुर थाना क्षेत्र के लहरनिया नदी किनारे मंगलवार को झाड़ियों में एक युवक का कंकाल मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। घटनास्थल का मंजर बेहद भयावह था। एक परास के पेड़ में रस्सी बंधी हुई थी, जबकि युवक का सिर और शरीर के अन्य अवशेष अलग-अलग अवस्था में पड़े थे।
मौके से मोबाइल, जींस की जेब में रखे दस्तावेज, आधार कार्ड और पैन कार्ड सहित अन्य सामान बरामद हुए। इन्हीं सामानों के आधार पर मृतक की पहचान दिग्घीबारी गांव निवासी दीनदयाल यादव के रूप में हुई।
मृतक की पत्नी कविता देवी ने बताया कि उनके पति 16 सितंबर 2026 को कमाने के बहाने घर से निकले थे। 16 से 20 सितंबर तक मोबाइल चालू था और बातचीत भी हुई थी, लेकिन 20 सितंबर के बाद मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। पति के लापता होने पर 17 सितंबर को ही आनंदपुर थाना में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया गया था। परिवार लगातार उनकी तलाश कर रहा था, लेकिन मंगलवार को कंकाल मिलने की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
वहीं मृतक के पिता योगेंद्र यादव, मां फगनी देवी और पत्नी कविता देवी ने पड़ोस के राजेंद्र यादव, उनके बेटे प्रमोद यादव, किसुनदेव यादव और रुपेश यादव पर घटना में संलिप्त होने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि घटना से करीब एक महीने पहले धमकी भी दी गई थी।
पति का कंकाल मिलने के बाद पत्नी कविता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। कविता देवी ने भावुक होकर कहा कि जिस तरह उनके पति की हत्या की गई है, आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उन्हें और उनके बच्चों को न्याय चाहिए।
घटना की सूचना पर आनंदपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। टीम ने कंकाल के अवशेष, मोबाइल और अन्य जरूरी साक्ष्य एकत्र किए। आनंदपुर थानाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि घटनास्थल से कंकाल के अवशेष, मोबाइल सहित अन्य साक्ष्य जुटाए गए हैं। मामले की जांच की जा रही है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता चल सकेगा।
दीनदयाल यादव अपने पीछे पत्नी कविता देवी और तीन मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। इनमें प्रियांशु कुमार 9 वर्ष, खुशी कुमारी 6 वर्ष और सोनाक्षी कुमारी 4 वर्ष की हैं। वहीं बूढ़े माता-पिता योगेंद्र यादव और फगनी देवी तथा बहन रूपा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। तीन मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया और बूढ़े माता-पिता का सहारा छिन गया।
फिलहाल गांव और परिजनों की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। परिजन आरोपियों की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 16 सितंबर को घर से निकले दीनदयाल यादव के साथ क्या हुआ और उनका कंकाल लहरनिया नदी किनारे किन परिस्थितियों में पहुंचा? इसका खुलासा पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।

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