“लैब टू लैंड” को मिलेगी नई गति : बिहार कृषि विश्वविद्यालय में कल होगी 29वीं प्रसार शिक्षा परिषद की बैठक।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर /बिहार।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में कल, 28 जुलाई, 2026 (मंगलवार) को प्रातः 10:00 बजे विश्वविद्यालय के मिनी ऑडिटोरियम में 29वीं प्रसार शिक्षा परिषद (Extension Education Council) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता बिहार कृषि विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह करेंगे। इस अवसर पर कृषि प्रसार के प्रख्यात विशेषज्ञ एवं भारत सरकार के योजना आयोग के कृषि विषयक पूर्व सलाहकार डॉ. वी. बी. सदामते विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। बैठक में विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों, अनुसंधान निदेशालय, प्रसार शिक्षा निदेशालय, विभिन्न विभागों के अध्यक्षों, वरिष्ठ वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों के साथ-साथ बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अंतर्गत संचालित सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष भी भाग लेंगे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय की “लैब टू लैंड” अवधारणा को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाना है, ताकि अनुसंधान प्रयोगशालाओं में विकसित उन्नत कृषि तकनीकों, नवीन किस्मों, उत्पादन एवं संरक्षण तकनीकों, कृषि यंत्रों, मूल्य संवर्धन तकनीकों तथा किसानोपयोगी नवाचारों को राज्य के किसानों तक शीघ्र एवं व्यापक रूप से पहुँचाया जा सके।
माननीय कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय के सभी विभागों से उनके द्वारा विकसित अथवा सत्यापित किसानोपयोगी तकनीकों, नवाचारों, उत्पादों एवं अनुशंसाओं का विवरण प्राप्त किया गया है। परिषद की बैठक में इन तकनीकों की उपयोगिता, किसानों के बीच उनकी स्वीकार्यता, विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता तथा राज्यव्यापी प्रसार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। डॉ. वी. बी. सदामते अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर अनुसंधान एवं प्रसार तंत्र के बीच बेहतर समन्वय, प्रभावी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा किसानों तक वैज्ञानिक उपलब्धियों को शीघ्र पहुँचाने की रणनीतियों पर अपने विचार एवं सुझाव साझा करेंगे।
बैठक में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अंतर्गत संचालित सभी कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की प्रगति प्रतिवेदन (Progress Report) की विस्तृत समीक्षा भी की जाएगी। विभिन्न केवीके द्वारा गत वर्ष संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (Front Line Demonstrations), प्रौद्योगिकी प्रसार गतिविधियों, किसान सहभागिता, नवाचारों तथा उपलब्धियों का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही आगामी वर्ष के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों की कार्ययोजना, प्राथमिकताओं एवं प्रसार रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श करते हुए भविष्य की कार्ययोजना निर्धारित की जाएगी, ताकि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित तकनीकों का प्रभावी हस्तांतरण राज्य के किसानों तक सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा विकसित तकनीकों का मूल्यांकन करते हुए ऐसी तकनीकों की पहचान की जाएगी जिन्हें बिहार के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में किसान आसानी से अपना सकें। इन तकनीकों के प्रभावी प्रसार हेतु कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से फील्ड डेमोंस्ट्रेशन, किसान प्रशिक्षण, किसान गोष्ठियों, किसान मेलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा अन्य प्रसार माध्यमों के व्यापक उपयोग की कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नई कृषि तकनीकों का विकास करना नहीं, बल्कि उन्हें किसानों के खेतों तक पहुँचाकर उनकी आय में वृद्धि, उत्पादन लागत में कमी, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना है। प्रसार शिक्षा परिषद की यह बैठक अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा शोध उपलब्धियों को किसानों तक शीघ्र पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।
बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर विश्वविद्यालय की आगामी प्रसार रणनीति निर्धारित की जाएगी, जिससे बिहार के किसानों को वैज्ञानिक, व्यवहारिक एवं स्थान-विशिष्ट कृषि तकनीकों का अधिकतम लाभ मिल सके तथा राज्य के कृषि विकास को नई दिशा एवं गति प्राप्त हो।
