अगस्त क्रांति दिवस पर मजदूरों ने किया प्रदर्शन, निकाला मार्च
मजदूर अधिकारों पर हमला मंजूर नहीं, आंदोलनकारियों के दमन पर लगे रोक
संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर बिहार
भागलपुर।आज सोमवार को मजदूर – किसान विरोधी, छात्र – युवा विरोधी मोदी सरकार की विनाशकारी शासन खिलाफ अगस्त क्रांति दिवस पर सोमवार को मजदूरों–किसानों ने देशभर में प्रतिवाद किया। भागलपुर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से जुड़े मजदूर स्थानीय सेवा कार्यालय में इक्कठा हुए और झंडे – बैनर के साथ कोतवाली – ततारपुर मार्ग पर मार्च निकाल कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकरियों ने केंद्र – राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए और लेबर कोड को रद्द करने सहित मोदी सरकार की देश विरोधी, दमनकारी नीतियों के खिलाफ उठ खड़ा होने का आह्वान किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, इंटक के जिला अध्यक्ष ई. रवि कुमार, सेवा की जिला अध्यक्ष उजरा बानो व एआईयूटीयूसी के प्रभारी रवि कुमार सिंह ने संयुक्त रुप से किया।
प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए मजदूर संगठनों के नेतृत्वकारियों ने मोदी सरकार को देश के लिए खतरा बताया। वक्ताओं ने कहा कि देश के मजदूरों को लेबर कोड कानून मंजूर नहीं है। पिछले दस – ग्यारह वर्षों के शासन में विनाशकारी मोदी सरकार ने देश को भारी क्षति पहुंचाई है। देश बर्बादी के कगार पर है। शिक्षा – स्वस्थ व्यवस्था चौपट है, महंगाई में तीव्र वृद्धि से आम मेहनतकश जनता परेशान है। झूठे विकास के नाम पर सरकारी खजाने की लूट हो रही है। किसानों की जमीन छीनी जा रही है और जबरन बेदखली जारी है। यह सरकार सिर्फ अपने कॉरपोरेट आकाओं के लिए काम करती है। वक्ताओं ने कहा हालिया छात्र–युवाओं के देशव्यापी आन्दोलन दे मोदी सरकार को सबक लेना चाहिए! अगस्त क्रांति दिवस पर देशव्यापी प्रतिरोध के जरिए मजदूर वर्ग मोदी सरकार को खुली चेतावनी देता कि उसके हर हमले का मुकाबला किया जाएगा। हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा गुलामी वाले इस चार लेबर कोडों को मजदूर वर्ग लगातार खारिज कर रहे हैं लेकिन केंद्र की विनाशकारी मोदी सरकार इन कोडों को मजदूरों के लिए फायदेमंद बताने के लिए झूठा प्रचार कर इसे मजदूरों पर थोपती जा रही है। पहले वाला लेबर कानून, मजदूरों के कानूनी सुरक्षा और अधिकार देते को खत्म करके बनाए गए चार लेबर कोड मज़दूरों को गुलाम बना रहें है और मालिकों की तानाशाही कायम कर रही है। इसके जरिए मज़दूरों को एक – डेढ़ सौ साल पीछे के अंधेरे युग में धकेल देने की कोशिश हो रही है। इस कोड ने ज्यादातर मज़दूरों को मजदूर के दर्जे और दायरे से बाहर कर दिया है, जिससे उनका वजूद ही खतरे में आ गया। आइए अगस्त क्रांति दिवस पर हम सब अपनी एकता को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लें और मोदी सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए खुद को तैयार करें।
प्रदर्शन में उपरोक्त सहित ऐक्टू के विष्णु कुमार मंडल, सुरेश प्रसाद साह, सिकंदर तांती, पूनम देवी, अमित गुप्ता, जयराम सिंह, प्रकाश सिंह, सुशीला देवी, पार्वती देवी, सुदामा पंडित, किशोर यादव, सेवा की मौसम देवी, पूनम केशरी, सरस्वती देवी, बेबी देवी, संजय राय, कमरुन निशां, गुड़िया देवी, बीवी मेहर, मुन्ना राय, इंटक के अभिषेक कुमार पिंटू आदि बड़ी संख्या में महिला – पुरुष मजदूर शामिल हुए।
*—सेंट्रल ट्रेड यूनियन्स, भागलपुर*
