2025 में स्वास्थ्य प्रणाली में गुणवत्ता और विस्तार का वर्ष – किशनगंज ने दर्ज किए अहम मील के पत्थर

सतत विकास लक्ष्य की दिशा में तेज़ प्रगति: रिकॉर्ड एनकवास प्रमाणन, एचडब्लूसी विस्तार, 212 एएनएम् की उपलब्धता, 06 एम् बी बीएस डॉक्टरों की तैनाती, पीकू व फील्ड हॉस्पिटल से गहन देखभाल मजबूत

नजमुल हसनैन जकी बिहार ब्यूरो
किशनगंज,
सतत विकास लक्ष्य (SDG-3 : सभी के लिए बेहतर स्वास्थ्य) की दिशा में किशनगंज के लिए वर्ष 2025 उपलब्धियों, मानव संसाधन में मजबूती और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का आधारभूत वर्ष साबित हुआ। गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यह वर्ष महत्त्वपूर्ण इसलिए भी रहा क्योंकि प्राथमिक से लेकर जिला स्तर तक जाँच, इलाज, रेफरल, आपदा-तैयारी और समुदाय आधारित सेवाओं में ठोस प्रगति दर्ज हुई। डीक्यूएसी सुमन सिन्हा ने कहा की इस वर्ष 13 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर राज्य स्तरीय एनकवास प्रमाणन में सफल रहे, जिनमें तेधागाछ प्रखंड के झाला , किशानंज के गाछपाड़ा और मोतिहारा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ने गुणवत्ता प्रदर्शन में राष्टीय स्तर पर नेतृत्व दिखाया। सक्रिय एचडब्लूसी की संख्या 146 से बढ़कर 174 होना और 212 एएनएम् व 06 एम् बी बीएस डॉक्टरों की तैनाती ने जिले में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग, टीबी और परिवार नियोजन सेवाओं की उपलब्धता को और मजबूत किया।
गुणवत्ता मूल्यांकन में प्रगति — 13 संस्थान राज्य प्रमाणन तक पहुँचे, राष्ट्रीय लक्ष्य 2026
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया की 2025 का लक्ष्य था गुणवत्ता के लिए आधार तैयार करना और प्राथमिक स्तर पर अधिकतम संस्थानों को प्रमाणन के मानकों तक लाना। 13 एचडब्लूसी का राज्य स्तरीय प्रमाणन हमारे दिशा-निर्देशन की पुष्टि है। 2026 में APHC और CHC को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित कराने की तैयारी की जाएगी, ताकि मरीजों को गुणवत्ता-आधारित सेवा सहज मिले। डीपीसी विश्वजीत कुमार ने कहा की जिले में 174 सक्रिय एचडब्लूसी के साथ SDG-3 के लक्ष्य के अनुरूप समुदाय में उपचार की पहुँच मजबूत हो रही है जो की स्वास्थ्य सेवाओं का लक्ष्य है कि मरीज का पहला संपर्क ही गुणवत्तापूर्ण हो। एचडब्लूसी की बढ़ी संख्या का सीधा लाभ जिसमे गाँव में ही एनसीडी स्क्रीनिंग, परिवार नियोजन परामर्श, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, एनीमिया व टीबी की जाँच और दवा उपलब्धता ये सब एक ही छत के नीचे। 2025 ने इसी नींव को मजबूत किया। मानव संसाधन में वृद्धि जिसमे 212 एएनएम् , 06 एम् बी बीएस , 05 आयुष चिकित्सकों से सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित किया जायेगा |विशेषज्ञों की उपलब्धता से जिला अस्पताल में सर्जरी, बाल स्वास्थ्य और आपात सेवाओं में निरंतरता आई है। एएनएम् की संख्या बढ़ने से एंटीनेटल केयर, टीकाकरण, परिवार नियोजन और जन-जागरूकता की रफ्तार भी तेज हुई है। यह मानवीय निवेश सतत विकास लक्ष्य के मूल में है।”
जाँच क्षमता में स्वावलंबन — 40 प्रकार की जाँचें निःशुल्क, जेब खर्च में कमी
डीपीएम डॉ मुनाजिम ने बताया की अब मरीजों को शुगर, किडनी, लीवर, हार्ट, हेपेटाइटिस, टायफाइड, थायराइड जैसी 40 आवश्यक जाँचें सदर अस्पताल में मुफ्त मिलती हैं। इससे जिले के हजारों मरीजों को आर्थिक राहत और उपचार की निरंतरता मिली है। यह जिला अस्पताल की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। वही जिले में आपदा-तैयारी और बाल स्वास्थ्य — 50-बेड फील्ड हॉस्पिटल, पीकू सेवाओं से गंभीर उपचार स्थानीय स्तर पर बनाया गया है |जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा की फील्ड हॉस्पिटल और पीकू सेवाएँ केवल संरचना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य-सुरक्षा हैं। हमारा प्रयास है की गंभीर बच्चों का इलाज जिले में हो, और किसी आपदा की स्थिति में उपचार बाधित न हो। हर महीने की समीक्षा और फील्ड भ्रमण का लक्ष्य है अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना।”
राष्ट्रीय उन्मूलन लक्ष्य — परिवार नियोजन, टीबी, कालाजार व फाइलेरिया पर केंद्रीकृत प्रयास
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया की सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप 2025 में परिवार नियोजन परामर्श, टीबी रोगियों की खोज, कालाजार प्रभावित क्षेत्रों में IRS एवं दवा उपलब्धता, और फाइलेरिया MDA अभियान को गति दी गई।इन पहलों के साथ एचडब्लूसी में FP परामर्श, टीबी रोगियों की पहचान, कालाजार केस रिफरल और MDA कवरेज में बढ़ोतरी दर्ज हुई। नए भवन एवं समुदाय आधारित संरचना 22 भवन और 70 नई आशा से स्वास्थ्य नेटवर्क मजबूत 22 नई इमारतें और 70 नई आशा के जुड़ने से समुदाय तक जागरूकता व सेवा-संचार की क्षमता बढ़ी। इससे परिवार नियोजन, प्रसवपूर्व-परामर्श, टीकाकरण, पोषण और MDA कवरेज में निरंतरता बनी रही।
2026 की दिशा — राष्ट्रीय प्रमाणन, रेफरल में कमी और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने आगे कहा की 2025 में हमने स्वास्थ्य सेवाओं की जड़ें मजबूत कीं। 2026 में राष्ट्रीय प्रमाणन, विशेषज्ञ उपलब्धता और रेफरल कम करने पर ध्यान होगा। जिला छोड़ने की मजबूरी कम हो यही हमारा लक्ष्य है। 2025 ने बनाई मजबूत नींव, 2026 देगा गति लक्ष्य वही: अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्ता-युक्त सेवा वर्ष 2025 में मानव संसाधन, गुणवत्ता मूल्यांकन, स्वास्थ्य अवसंरचना, जाँच क्षमता, सामुदायिक भागीदारी और आपदा-प्रबंधन के क्षेत्र में जो प्रगति हुई, उसने किशनगंज को SDG-3 के लक्ष्य — “सभी के लिए स्वास्थ्य” की दिशा में ठोस आधार दिया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!