Katihar:वेंडर स्टॉलों में बिचौलियों के खेल की जांच हो
संवाददाता मनोज कुमार कटिहार/बिहार
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की ओर से मंगलवार को रेल यात्रियों की सुविधा, बेरोजगार युवाओं को रोजगार और क्षेत्रीय विकास से जुड़ी विभिन्न ज्वलंत मांगों को लेकर कटिहार रेल मंडल प्रबंधक (डीआरएम) को एक पांच सूत्री मांगपत्र सौंपा गया। संगठन के राष्ट्रीय सचिव सह पश्चिम बंगाल एवं असम राज्य प्रभारी अजय कुमार साह के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने जनहित से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर रेल प्रशासन से कार्रवाई की मांग उठाई।
सौंपे गए मांगपत्र में सबसे प्रमुख मांग एनएफ रेलवे के अंतर्गत चतुर्थ वर्गीय कर्मियों, सहायक लोको पायलट (एएलपी), टेक्नीशियन एवं रेलवे कंट्रोलर के लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू करने की की गई है। संगठन का साफ कहना है कि इन पदों के खाली होने से जहां एक ओर रेलवे के परिचालन कार्य प्रभावित हो रहे है। यदि यह बहाली अविलंब शुरू होती है, तो इससे क्षेत्र के हजारों युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा। मांगपत्र की दूसरी बड़ी मांग के तहत कटिहार जंक्शन से रांची, सूरत एवं दक्षिण भारत के विभिन्न महत्वपूर्ण शहरों के लिए नई ट्रेनों का परिचालन शुरू करने की वकालत की गई है।
मुजफ्फरपुर-यशवंतपुर साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन को यात्रियों की भारी तादाद को देखते हुए प्रतिदिन चलाने का पुरजोर आग्रह किया गया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि इन रूटों पर मुसाफिरों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन ट्रेनों की घोर कमी के कारण लोगों को लंबी प्रतीक्षा सूची और भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, कटिहार-जोगबनी डीएमयू पैसेंजर ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को होने वाली दिक्कतों को देखते हुए इसमें तुरंत चार से पांच अतिरिक्त कोच जोड़ने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। प्रतिनिधिमंडल ने डीआरएम से जनहित में इन सभी मांगों पर सकारात्मक और त्वरित पहल करने की अपील की है। इस मौके पर प्रदेश मीडिया प्रभारी अमित नारायण, जिला अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह, प्रदीप अग्रवाल, दिनेश शर्मा, आशेश्वर गुप्ता, शंकर पोद्दार, अमितेश महतो, मुन्ना सिंह, सचिन कुमार, रोहित कुमार और बिट्टू कुमार सहित संगठन के कई मुख्य सदस्य मौजूद रहे। मांगपत्र में कटिहार जंक्शन के पुराने मॉडल स्टेशन परिसर और रेलवे की खाली पड़ी कीमती जमीन के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव भी बेहद प्रमुखता से रखा गया है। खाली पड़े क्षेत्र में आकर्षक उद्यान, फव्वारे, यात्रियों के बैठने की समुचित व्यवस्था, मिथिला संस्कृति को दर्शाती मधुबनी पेंटिंग जैसी स्थानीय कला का भव्य प्रदर्शन, फूड प्लाजा, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बजट होटल और मल्टी लेवल कार पार्किंग जैसी आधुनिक सुविधाएं युद्धस्तर पर विकसित की जानी चाहिए, ताकि स्टेशन को एक नया लुक मिले। प्रतिनिधिमंडल ने प्लेटफॉर्म संख्या एक से आठ तक संचालित हो रहे वेंडर स्टॉलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।इनकी जांच कराकर नए वेंडरों की बहाली की मांग की है। संगठन का सीधा आरोप है कि रेल मंडल में बिचौलियों और दलालों के बढ़ते प्रभाव के कारण जरूरतमंद लोगों को वेंडरशिप का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में तो एक ही रसूखदार व्यक्ति द्वारा बेनामी तरीके से कई स्टॉल संचालित किए जाने की बात भी सामने आई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी बेहद जरूरी है।
