लोक अदालत का मूल मंत्र ‘न कोई जीते-न कोई हारे’: कटिहार में सैकड़ों मामले निपटे, फरियादियों को मिला फास्ट रिलीफ संवाददाता मनोज कुमार कटिहार /बिहार कटिहार जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का वृहद आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न प्रकृति के सैकड़ों लंबित मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर त्वरित निष्पादन किया गया। जिला पदाधिकारी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश और पुलिस अधीक्षक सहित तमाम न्यायिक व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उद्घाटन किया राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना के निर्देश पर आयोजित इस लोक अदालत की शुरुआत सुबह 10 बजे हुई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दीप प्रज्वलित कर इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर डीएम, एसपी, एडीजे, सीजेएम, एसडीजेएम, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष-सचिव और बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे। मनरेगा मजदूरी और भू-विवाद मामलों की सुनवाई लोक अदालत के लिए कुल 12 बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों में दीवानी, फौजदारी के शमनीय वाद, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस, बिजली-बिल, जल-कर, टेलीफोन बिल, मनरेगा मजदूरी और भू-विवाद से जुड़े प्री-लिटिगेशन मामलों की सुनवाई हुई। पक्षकारों को सुनवाई के लिए पहले ही नोटिस भेजकर बुलाया गया था। आपसी सहमति से खत्म होता हैं मामले जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपने संबोधन में लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “लोक अदालत का मूल मंत्र है न कोई जीते, न कोई हारे। यहां दोनों पक्षों की जीत होती है क्योंकि मामला आपसी सहमति से खत्म होता है। इससे समय, पैसा और रिश्ते तीनों बचते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि लोक अदालत में पारित अवार्ड को सिविल कोर्ट की डिक्री का दर्जा प्राप्त है और इसके खिलाफ कोई अपील नहीं होती। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि छोटे-छोटे विवादों को लेकर सालों तक कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाने से आम आदमी का समय और संसाधन बर्बाद होता है। लोक अदालत जैसे मंच से त्वरित न्याय मिलने पर लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बढ़ता है। उन्होंने राजस्व, बैंक और बिजली विभाग के अधिकारियों को अगली लोक अदालत के लिए सक्रियता से काम करने के निर्देश दिए। एसपी ने कहा- थानों में भी सुलह को दें बढ़ावा पुलिस अधीक्षक कटिहार शिखर चौधरी ने बताया कि कई आपराधिक मामले मामूली विवाद से शुरू होते हैं। अगर थाने स्तर पर ही काउंसलिंग कर सुलह करा दी जाए तो एफआईआर और कोर्ट तक मामला पहुंचेगा ही नहीं। उन्होंने सभी थानाध्यक्षों को लोक अदालत की भावना से काम करने को कहा। पक्षकारों के चेहरे पर दिखी राहत मनिहारी से आए 65 वर्षीय रामप्रवेश यादव का 8 साल पुराना जमीन विवाद आज खत्म हुआ। उन्होंने कहा, “बेटे की शादी के लिए पैसा चाहिए था, मगर जमीन पर केस चल रहा था। आज सामने वाले से समझौता हो गया। अब डर नहीं लगेगा।” वहीं एक महिला पक्षकार ने बताया कि दहेज उत्पीड़न के केस में पति से सुलह हो गई और अब दोनों साथ रहेंगे। कुल निष्पादन और वसूली जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने बताया कि देर शाम तक चली लोक अदालत में कुल 1,872 मामले निष्पादित हुए। इनमें 4.36 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि पर सहमति बनी। बैंक ऋण के 312 मामलों में 1.82 करोड़, बिजली बिल के 540 मामलों में 62 लाख और मोटर दुर्घटना के 28 मामलों में 95 लाख रुपये का समझौता हुआ। आगे भी जारी रहेगा अभियान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने सभी अधिवक्ताओं से अपील की कि वे अपने मुवक्किलों को लोक अदालत का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करें। अगली राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर 2026 को आयोजित होगी। कार्यक्रम के अंत में सभी न्यायिक पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों और पैरालीगल वालंटियर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
