ठाकुरगंज अंचल कार्यालय में बासगीत पर्चा फर्जीवाड़े का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
ठाकुरगंज, किशनगंज। ठाकुरगंज अंचल कार्यालय में बासगीत पर्चा जारी करने के नाम पर बड़े पैमाने पर कथित फर्जीवाड़े और अवैध वसूली का मामला सामने आया है। ठाकुरगंज प्रखंड के प्रमुख प्रतिनिधि सद्दाम हुसैन ने इस संबंध में किशनगंज के जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अंचल कार्यालय से जुड़े कुछ कर्मियों और बाहरी बिचौलियों की कथित मिलीभगत से एक संगठित तरीके से ऐसे बासगीत पर्चे तैयार किए जा रहे हैं, जिनका मूल सरकारी अभिलेखों से मिलान नहीं हो रहा है। आवेदन के अनुसार, कथित तौर पर वर्तमान में पर्चा तैयार कर उस पर पांच से दस वर्ष पुरानी तारीख अंकित की जा रही है, ताकि उसे पूर्व में निर्गत दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
पूर्व सीओ के हस्ताक्षर वाले पर्चों की जांच की मांग
शिकायत में पूर्व अंचल अधिकारी ओम प्रकाश भगत के हस्ताक्षर वाले कई संदिग्ध बासगीत पर्चों का उल्लेख किया गया है। आवेदक ने मांग की है कि इन दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षरों की फोरेंसिक और हस्तलेख विशेषज्ञों से जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हस्ताक्षर वास्तविक हैं या कथित तौर पर उनकी कूटरचना की गई है।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि संदिग्ध बासगीत पर्चों के आधार पर जमीन का दाखिल-खारिज और जमाबंदी तैयार की जा रही है। इसके अलावा, लाभुकों से बासगीत पर्चा दिलाने के नाम पर कथित रूप से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
दाखिल-खारिज में भी अनियमितता का आरोप
शिकायतकर्ता ने अंचल कार्यालय में पैसे लेकर दाखिल-खारिज किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
13 बिंदुओं पर जांच की मांग
प्रमुख प्रतिनिधि ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 13 बिंदुओं पर जांच की मांग की है। इनमें पिछले पांच वर्षों में जारी किए गए सभी बासगीत पर्चों की सूची और उनकी मूल संचिका, आदेश-पत्र, निर्गमन पंजी तथा डिस्पैच रजिस्टर को सुरक्षित करने और सील करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा पूर्व सीओ के हस्ताक्षर वाले पर्चों की फोरेंसिक जांच, ऑनलाइन सिस्टम की लॉगिन हिस्ट्री, यूजर आईडी, डेटा एंट्री की तारीख और दस्तावेज अपलोड किए जाने की तारीख की तकनीकी जांच कराने को कहा गया है। शिकायत में ऐसे सभी मामलों की समीक्षा की मांग की गई है, जिनमें मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के बावजूद दाखिल-खारिज या जमाबंदी कायम की गई है।
लाभुकों के बयान के साथ-साथ संबंधित बैंक लेन-देन, यूपीआई ट्रांजेक्शन और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोपों में संलिप्त पाए जाने वाले कर्मियों और बिचौलियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय स्तर की जांच पर उठाई आशंका
प्रमुख प्रतिनिधि ने आशंका जताई है कि यदि मामले की जांच स्थानीय स्तर पर ही की गई तो प्रभावशाली लोगों को बचाया जा सकता है और सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की संभावना बनी रह सकती है। इसलिए उन्होंने जिला स्तर के वरीय अधिकारियों की निगरानी में स्वतंत्र जांच टीम गठित कर मामले की जांच कराने की मांग की है।
इस संबंध में जिलाधिकारी के अलावा पुलिस अधीक्षक, अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी, डीसीएलआर, राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव और जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को भी आवेदन दिए जाने की बात कही गई है।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सत्यता है।
