कटिहार में अब नैनो यूरिया व संतुलित खाद से बढ़ेगी उपज
संवाददाता मनोज कुमार कटिहार/बिहार
कृषि विज्ञान केंद्र कटिहार में बुधवार को उर्वरक के संतुलित उपयोग एवं एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत सुधारना और किसानों की लागत कम कर उत्पादन बढ़ाना रहा। जिले के विभिन्न प्रखंडों से पहुंचे 40 प्रगतिशील किसानों को आधुनिक खेती और उर्वरकों के वैज्ञानिक इस्तेमाल की बारीकियां समझाई गईं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केवीके के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. मृणाल वर्मा ने मृदा परीक्षण की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खरीफ की बुआई से पहले किसान भाई अपने खेतों की मिट्टी का नमूना लेकर केंद्र में स्थित मृदा जांच प्रयोगशाला जरूर आएं।
मिट्टी की जांच रिपोर्ट में दी गई अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें, ताकि मिट्टी की उर्वरकता बनी रहे और अनावश्यक खर्च से बचा जा सके। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुशील सिंह ने किसानों को भविष्य की खेती यानी नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के प्रभावी प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं, कृषि वैज्ञानिक श्री पंकज कुमार ने रासायनिक खादों के विकल्प के तौर पर हरी खाद और जीवाणु उर्वरक जैसे एजॉटोबैक्टर व फास्फेट घोलक जीवाणु के महत्व को रेखांकित किया। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि केवल पारंपरिक खाद के भरोसे रहने के बजाय एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाकर ही किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
