सामाजिक सुरक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ मजदूरों ने किया प्रदर्शन

सामाजिक सुरक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ मजदूरों ने किया प्रदर्शन

मजदूर अधिकारों में कटौती मंजूर नहीं, कॉरपोरेट परस्त लेबर कोड्स रद्द करो : ऐक्टू

रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।

कॉरपोरेट परस्त लेबर कोड्स कानून और मजदूर अधिकारों पर लगातार बढ़ रहे हमलों के खिलाफ ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने अपने मई अभियान के 23वें दिन शनिवार को स्थानीय सच्चिदानंदनगर में मजदूरों को गोलबंद कर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में हवाईअड्डा, लोदीपुर, जिछो, रविचक, नयाटोला आदि मोहल्लों के महिला – पुरुष मजदूरों ने एकजुट होकर सामाजिक सुरक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार व धांधली के खिलाफ सरकार और श्रम विभाग के विरोध में नारे लगाए और कॉर्पोरेट परस्त, मजदूर विरोधी लेबर कोड्स को रद्द करने तथा मजदूर आंदोलनों के दमन पर रोक लगाने की मांग की।

अभियान का नेतृत्व कर रहे ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने मौके पर मजदूरों को सम्बोधित करते हुए केंद्र – राज्य सरकारों की मजदूर विरोधी नीतियों की विस्तृत जानकारी देते हुए संगठन की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने लेबर कोड्स कानून पर मोदी सरकार के झूठे प्रचार का भंडाफोड़ करते हुए कहा कि नए लेबर कोड्स कानून के लागू होने से श्रम सम्बन्धों में एक बड़ा बदलाव आया है जो पूंजीपतियों, कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में है। यह नया कानून मजदूरों के शोषण को और अधिक बढ़ा रहा है। वर्षों की लड़ाई से मजदूरों ने अपने लिए जो कुछ भी कानूनी सुरक्षा हासिल किए थे मोदी सरकार ने एक झटके में उसे खत्म कर दिया है। मजदूरों के सारे अधिकार छीन लिए गए हैं। विनाशकारी मोदी सरकार सिर्फ कॉरपोरेट घरानों और अपने पूंजीपति आकाओं के हित में काम कर रही है। महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे मजदूर पहले ही काफी परेशान है। सरकार की इस एकतरफा और मजदूर विरोधी उकसावेपूर्ण कार्रवाई का जबाव देने के लिए एकजुट हों, अपने संगठन से जुड़ें और न्याय व अधिकार की लड़ाई का भागीदार बनें।
उन्होंने लेबर कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और धांधली का जिक्र करते हुए कहा कि लेबर ऑफिस भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। 3000/- रुपए प्रति वर्ष मिलने वाला स्वास्थ भत्ता पिछले 6 सालों, यानी 2021 से नहीं मिला है। मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के लाभ से वंचित किया जा रहा है। मजदूरों को लूट और ठगी का शिकार होने के लिए बाजार के भरोसे छोड़ दिया गया है। मजदूरों के आक्रोश को दबाने के लिए उच्च अधिकारी मजदूरों को झूठे आश्वासन से बरगलाते हैं किंतु समस्याओं का निराकरण नहीं करते! ऐप अपडेट करने के नाम पर मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा को हड़पा जा रहा है। 10 दिनों के अंदर अगर मजदूरों की समस्याओं का हल नहीं निकाला गया और सारे आवेदनों का निपटारा कर मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं दिया गया तो हर स्तर पर श्रम अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।

कार्यक्रम में प्रमुख रुप से _ऐक्टू_ के अमर कुमार, राजेश कुमार, _बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन_ के चंचल पंडित, दिनेश कापरी, हरिलाल साह, संतोष साह, किशोर मंडल, बिंदु देवी, रुपम देवी, सुलोचना देवी, प्रीति देवी, चंदा देवी, बन्दना देवी, शारदा देवी, योगेंदर साह, सुशीला देवी, सीमा कुमारी, श्वेता कुमारी, कविता देवी, सरिता देवी, प्रेम लाता देवी, पूजा कुमारी, पुनम देवी, कैलाश साह, रूबी देवी, _असंगठित कामगार महासंघ_ के अमित कुमार, मो. मुमताज, मो. रुस्त शेखर कुमार सिंह, प्रीति कुमारी, भरतलाल सिंह, सीताराम सिंह, शंभू प्रसाद सिंह, सुलेखा देवी, चिंता देवी, लक्ष्मी कुमारी, सुखदेव चौधरी, गुड़िया कुमारी, रंजू देवी, नीलम देवी, सुनीता देवी, मीणा देवी आदि बड़ी संख्या में महिला – पुरुष मजदूर शामिल हुए।

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