फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में जिले का बड़ा अभियान : 5804 बच्चों की हुई जाँच, 17 में संक्रमण की पुष्टि
*टीएएस-1 सर्वेक्षण के माध्यम से विद्यालयों में बच्चों की हो रही वैज्ञानिक जाँच, संक्रमण की वास्तविक स्थिति का लगाया जा रहा पता*
किशनगंज
फाइलेरिया जैसी गंभीर मच्छरजनित बीमारी के उन्मूलन को लेकर किशनगंज जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित टीएएस-1 (ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वेक्षण-1) अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। वर्षों से चलाए जा रहे सामूहिक दवा सेवन अभियान के बाद अब जिले में यह वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जा रहा है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि समुदाय में फाइलेरिया संक्रमण का स्तर कितना कम हुआ है तथा बीमारी के प्रसार की श्रृंखला किस हद तक टूटी है।फाइलेरिया एक परजीवी जनित रोग है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। इस बीमारी के कारण शरीर के अंगों में असामान्य सूजन उत्पन्न हो जाती है, जिससे व्यक्ति को आजीवन शारीरिक एवं सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। टीएएस-1 सर्वेक्षण के अंतर्गत विशेष रूप से कक्षा 1 एवं 2 के बच्चों की जाँच की जा रही है, क्योंकि यह आयु वर्ग हालिया संक्रमण की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।
जिले में अब तक 5804 बच्चों की जाँच, 17 बच्चे पाए गए संक्रमित
ठाकुरगंज प्रखंड को छोड़कर जिले के विभिन्न प्रखंडों में संचालित टीएएस-1 अभियान के अंतर्गत अब तक कुल 5804 बच्चों की जाँच की जा चुकी है। जाँच के दौरान 17 बच्चों में फाइलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चयनित सरकारी एवं निजी विद्यालयों में प्रशिक्षित टीमों के माध्यम से लगातार जाँच अभियान चलाया जा रहा है। प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के नमूने लेकर वैज्ञानिक पद्धति से परीक्षण किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप जाँच कार्य लगातार जारी है।अभियान के क्रम में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी तथा श्री अविनाश राय द्वारा किशनगंज मूल्यांकन इकाई के अंतर्गत संचालित टीएएस गतिविधि का लगातार पर्यवेक्षण किया जा रहा है ।विद्यालय में पहुँचकर अधिकारियों ने जाँच प्रक्रिया, नमूना संग्रहण, बच्चों की उपस्थिति एवं अभिलेख संधारण की समीक्षा की। अधिकारियों ने स्वास्थ्य टीमों को निर्देश दिया कि सर्वेक्षण कार्य पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ संपन्न किया जाए।
“फाइलेरिया उन्मूलन जनसहभागिता से ही संभव”
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह समाज से जुड़ा महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य अभियान है। उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें तथा जाँच कार्य में स्वास्थ्य विभाग की टीमों का सहयोग करें।उन्होंने कहा कि टीएएस-1 सर्वेक्षण के माध्यम से जिले में संक्रमण की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है, जिससे भविष्य में फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा और अधिक मजबूत होगी।
“प्रारंभिक अवस्था में पहचान से संक्रमण नियंत्रण में मिलती है सहायता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया संक्रमण की समय पर पहचान एवं उपचार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विद्यालय आधारित सर्वेक्षण के माध्यम से बच्चों में संक्रमण की स्थिति का पता लगाया जा रहा है, ताकि आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों की जाँच को लेकर किसी प्रकार की भ्रांति न रखें, क्योंकि यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित एवं वैज्ञानिक है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है।
“सभी टीमों को गुणवत्ता पूर्ण जाँच के लिए दिए गए हैं निर्देश”
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि टीएएस-1 अभियान फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने कहा कि सभी टीमों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं दिशा-निर्देश दिए गए हैं, ताकि सर्वेक्षण कार्य पूरी गुणवत्ता एवं पारदर्शिता के साथ संपन्न हो सके।उन्होंने कहा कि विद्यालय आधारित जाँच से कम समय में बड़ी संख्या में बच्चों की वैज्ञानिक जाँच संभव हो रही है। डॉ. आलम ने अभिभावकों एवं शिक्षकों से अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है।
