डेस्क/बिहार
लोकेशन/नवगछिया
रिपोर्ट/अमित कुमार
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राघोपुर में तटबंध टूटने के बाद स्थायी समाधान पर उठे सवाल, अर्पणा कुमारी ने मांगा सरकार से जवाब
2023 में ही दर्ज हो चुका था कटाव का खतरा, फिर भी 2026 में टूटा तटबंध; गाइड बांध एवं नदी प्रशिक्षण कार्य की मांग
नवगछिया । खरीक प्रखंड के राघोपुर में कटाव और तटबंध टूटने के बाद अब बाढ़ राहत से आगे स्थायी नदी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व बिहपुर विधानसभा प्रत्याशी अर्पणा कुमारी ने प्रभावित इलाके का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और सरकार से स्थायी समाधान की मांग की।
अर्पणा कुमारी ने कहा कि राघोपुर की समस्या अचानक पैदा नहीं हुई है। उनके अनुसार, 6 फरवरी 2023 की विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट में ही विक्रमशिला सेतु के आसपास गंगा में बढ़ते कटाव को देखते हुए। गाइड बांध एवं नदी प्रशिक्षण कार्य की आवश्यकता दर्ज की गई थी।
उन्होंने बताया कि इसके बाद वर्ष 2025 में राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल और रेलवे के बीच इस मुद्दे को लेकर पत्राचार हुआ। जनवरी 2026 में भी गाइड बांध निर्माण को लेकर मोर्थ की स्वीकृति रिपोर्ट मांगी गई। इसके बावजूद 24 अगस्त 2026 की रात राघोपुर में तटबंध टूट गया, जिससे बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए।
अर्पणा कुमारी ने सवाल उठाते हुए कहा, “जब 2023 में ही नदी सुरक्षा उपायों की जरूरत सामने आ गई थी और 2025-26 में भी पत्राचार व निरीक्षण हुए, तो स्थायी कटावरोधी कार्य समय पर क्यों नहीं हो सके?”
पानी घटा, लेकिन संक्रमण का खतरा बरकरार
राघोपुर इलाके में अब बाढ़ का पानी कम होने लगा है, लेकिन कई जगह कीचड़, गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी हुई है। इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। अर्पणा कुमारी ने सामुदायिक रसोई का निरीक्षण किया और प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव, स्वास्थ्य शिविर, साफ-सफाई तथा सुरक्षित पेयजल की तत्काल व्यवस्था करने की मांग की।
उन्होंने बताया कि 15 सितंबर को प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर राघोपुर और विक्रमशिला सेतु क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने की मांग की गई है।
अर्पणा कुमारी ने कहा कि राहत और पुनर्वास के साथ अब दीर्घकालिक नदी सुरक्षा योजना पर काम करना जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर
गाइड बांध एवं नदी प्रशिक्षण कार्य और मजबूत तटबंध का निर्माण कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में राघोपुर समेत आसपास के गांवों को बार-बार बाढ़ और कटाव का सामना न करना पड़े।
अब मुख्य सवाल यही है कि वर्षों पहले कटाव के खतरे की जानकारी सामने आने के बावजूद स्थायी सुरक्षा कार्य क्यों नहीं हो सके और भविष्य में सरकार राघोपुर तथा विक्रमशिला सेतु क्षेत्र की नदी सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
