बीमारी आने से पहले पहचान की तैयारी, स्वास्थ्य तंत्र ने बढ़ाई जमीनी सक्रियता
टीबी, एनीमिया, गैर-संचारी रोगों और लैंगिक उत्पीड़न जैसे विषयों पर कर्मियों की क्षमता बढ़ाने से लेकर गांव-गांव स्क्रीनिंग तक जोर;
कोचाधामन सीएचसी में कार्यक्रमों और अस्पताल की व्यवस्थाओं की हुई समीक्षा
किशनगंज, 07 अक्टूबर।
किसी बीमारी का समय पर पता चल जाना कई बार उसके गंभीर रूप लेने से पहले ही उपचार का रास्ता खोल देता है। इसी सोच के साथ आम लोगों के स्वास्थ्य को केवल बीमारी के उपचार तक सीमित रखने के बजाय उसकी पहचान, रोकथाम, जागरूकता और समय पर उपचार को स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। जिले में इसी दिशा में स्वास्थ्य विभाग एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है। एक ओर स्वास्थ्यकर्मियों को टीबी, एनीमिया, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की स्क्रीनिंग तथा लैंगिक उत्पीड़न जैसे संवेदनशील विषयों पर प्रशिक्षण देकर उनकी क्षमता बढ़ाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर चल रहे स्वास्थ्य अभियानों की जमीनी प्रगति और अस्पतालों की व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है।एनसीडीओ डॉ. उर्मिला कुमारी द्वारा पीएचसी किशनगंज में स्वास्थ्यकर्मियों को टीबी, एनीमिया, एनसीडी स्क्रीनिंग और लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों को समुदाय में इन समस्याओं की पहचान, लोगों को उचित परामर्श देने और जरूरत पड़ने पर समय पर स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने के लिए अधिक सक्षम बनाना रहा।प्रशिक्षण के साथ अब इसका असर क्षेत्र में चल रहे कार्यों में भी दिखाई दे रहा है। जिले में एनसीडी स्क्रीनिंग और एनीमिया स्क्रीनिंग का कार्य जारी है। स्वास्थ्यकर्मी लोगों की जांच कर जोखिम वाले मामलों की पहचान करने के साथ उन्हें आवश्यक परामर्श और उपचार की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। खासकर एनीमिया जैसी समस्या, जिसे कई बार सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, उसकी पहचान को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण से लेकर धरातल तक, हर स्तर पर निगरानी
स्वास्थ्य कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए केवल अभियान चलाना ही पर्याप्त नहीं है। इसकी प्रगति कितनी हुई, सेवाएं लोगों तक किस तरह पहुंच रही हैं और अस्पताल स्तर पर व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं, इसकी नियमित समीक्षा भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी लगातार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं।
इसी क्रम में सीडीओ डॉ. मंजर आलम ने सीएचसी कोचाधामन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वर्तमान में संचालित एनसीडी स्क्रीनिंग और एनीमिया मुक्त भारत अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही अस्पताल में चल रहे कार्यों और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी देखी गई।डॉ. मंजर आलम ने ड्यूटी पर उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों से कार्यक्रमों की प्रगति की जानकारी ली और कार्यों को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप गति देने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। समीक्षा का फोकस इस बात पर रहा कि अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि स्क्रीनिंग के माध्यम से चिन्हित लोगों को आवश्यकता के अनुसार आगे की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए।
जांच के बाद उपचार तक पहुंचे मरीज, यही है अभियान की असली कसौटी
स्वास्थ्य विभाग की मौजूदा रणनीति में स्क्रीनिंग को उपचार से जोड़ने पर विशेष जोर है। एनसीडी के तहत उच्च रक्तचाप, मधुमेह सहित अन्य गैर-संचारी रोगों की समय रहते पहचान लोगों को गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी तरह एनीमिया की पहचान के बाद संबंधित व्यक्ति को चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना अभियान की प्रभावशीलता तय करता है।जिले में प्रशिक्षण, स्क्रीनिंग और क्षेत्रीय समीक्षा को एक-दूसरे से जोड़कर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक उत्तरदायी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यही है कि स्वास्थ्य केंद्र केवल उपचार का स्थान न रहें, बल्कि बीमारी की शुरुआती पहचान और लोगों को समय पर सही स्वास्थ्य सेवा से जोड़ने का पहला मजबूत पड़ाव बनें। सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि यह सक्रियता इस बात का संकेत है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा उपचार से आगे बढ़ाकर रोकथाम, समय पर पहचान, संवेदनशीलता और निरंतर निगरानी तक विस्तारित करने पर जोर दिया जा रहा है।
