भागलपुर में 27 साल पुराने भूमि विवाद में आशा देवी की जीत, बुलडोजर की मौजूदगी में दुकानदारों ने खुद खाली की दुकानें

संवाददाता शुभम कुमार भागलपुर

भागलपुर में बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निवासी आशा देवी के बीच पिछले 27 वर्षों से चला आ रहा भूमि विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। कोर्ट के आदेश के बाद महात्मा गांधी रोड स्थित सिविल सर्जन कम्पाउंड में बनी दर्जनों दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। प्रशासन दो बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचा हालांकि बुलडोजर चलाया नहीं गया है।बुलडोजर और प्रशासनिक टीम की मौजूदगी से इलाके में हलचल मच गई। कोर्ट के आदेश की जानकारी मिलते ही दुकानदारों ने किसी भी सख्त कार्रवाई से बचने के लिए खुद ही अपनी दुकानों का सामान समेटना शुरू कर दिया। दुकानें तेजी से खाली की जा रही हैं। मौके पर कोर्ट के नाजिर, अधिवक्ता और दंडाधिकारी भी मौजूद हैं जो पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। यह विवाद वर्ष 1998 से न्यायालय में चल रहा था। आशा देवी ने वर्ष 2011 में निचली अदालत से केस जीत लिया था जबकि वर्ष 2024 में अपील में भी उनके पक्ष में फैसला आया। इसके बाद कल कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। आदेश के अनुपालन में प्रशासन मौके पर पहुंचा और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 1985 के सर्वे से जुड़ी हुई है। उस समय सरकारी अमीन बैजनाथ गुप्ता द्वारा किए गए सर्वे में सिविल सर्जन कम्पाउंड के एक हिस्से को आशा देवी के नाम से दर्ज कर दिया गया था। जमीन का खतियान सरकारी बताया जाता है। इस सर्वे गड़बड़ी के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने संबंधित सरकारी अमीन को बर्खास्त भी किया था। इसके बाद वर्ष 1998 में यह मामला कोर्ट पहुंचा।निचली अदालतों में सरकारी अपील खारिज होती रही जबकि मामला हाईकोर्ट में भी एडमिट हुआ लेकिन अब तक किसी तरह का स्टे नहीं मिला है। भागलपुर कोर्ट में सब जज-2 और सीजेएम की अदालत के आदेश के बाद यह कार्रवाई की जा रही है।इस पूरे मामले पर सिविल सर्जन के लीगल एडवाइजर अब्दुल रब्बानी ने बताया कि मामला अभी भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है और वहां से कोई नया आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में कोर्ट के निर्देश का पालन किया जा रहा है। अब देखना होगा कि आगे स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।

 

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