बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बि.कृ.वि.), सबौर के कुलपति के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा केंद्रीय समेकित कीट प्रबंधन केंद्र, पटना तथा बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर के पादप रोग विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली पोर्टल पर एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया।
रिपोर्ट – अमित कुमार भागलपुर/बिहार।
कार्यक्रम का उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से कीट एवं रोग निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ बनाना तथा वैज्ञानिकों एवं फसल संरक्षण विशेषज्ञों की क्षमता का विकास करना था।
अपने संबोधन में डॉ. आर. के. सोहाने ने कहा कि राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (NPSS) समयबद्ध कीट एवं रोग निगरानी, पूर्व चेतावनी तथा स्थान-विशिष्ट परामर्श उपलब्ध कराने की दिशा में भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण एवं परिवर्तनकारी पहल है।
सह निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर. एन. सिंह ने डिजिटल कृषि की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों तक समय पर वैज्ञानिक परामर्श पहुँचाना अब अधिक प्रभावी एवं सरल हो गया है। वहीं डॉ. अभय मानकर ने डिजिटल कृषि एवं एनपीएसएस की भूमिका पर तकनीकी व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए सतत फसल संरक्षण में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का समन्वयन बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर के सहायक प्राध्यापक-सह-कनिष्ठ वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान) एवं एनपीएसएस के विश्वविद्यालय नोडल पदाधिकारी डॉ. सुरेश पाटिलने किया। उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों से अवगत कराया तथा वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों एवं अनुसंधान केंद्रों के समन्वित प्रयासों से एक सुदृढ़ राष्ट्रीय कीट निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र केंद्रीय समेकित कीट प्रबंधन केंद्र, पटना के विशेषज्ञों द्वारा संचालित किए गए। श्री मोहन कुमार, सहायक पादप संरक्षण पदाधिकारी (कीट विज्ञान), ने एनपीएसएस पोर्टल एवं मोबाइल एप्लीकेशन के उपयोग, उपयोगकर्ता पंजीकरण, कीट एवं रोगों की पहचान, निगरानी पद्धतियों, जियो-टैगिंग तथा चित्र अपलोड करने की प्रक्रिया का विस्तृत प्रशिक्षण दिया।
श्री विवेक कांत गुप्ता, पादप संरक्षण पदाधिकारी (पादप रोग विज्ञान), ने एनपीएसएस वेब पोर्टल एवं मोबाइल एप्लीकेशन का प्रदर्शन करते हुए रिपोर्टिंग प्रक्रिया, परामर्श निर्माण, तकनीकी समस्याओं के समाधान तथा डिजिटल डाटा प्रबंधन की जानकारी दी। प्रतिभागियों के लिए क्षेत्रीय प्रदर्शन (फील्ड डेमोंस्ट्रेशन) भी आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में एनपीएसएस एप्लीकेशन के माध्यम से कीट निगरानी का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों एवं अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिकों, संकाय सदस्यों, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों एवं कर्मियों, अनुसंधान केंद्रों के कर्मचारियों तथा शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
अंत में डॉ. सुरेश पाटिल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेषज्ञ वक्ताओं एवं सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
**कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर** ने इस अवसर पर कहा कि विश्वविद्यालय डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने तथा वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी आधारित कृषि सेवाओं को किसानों तक पहुँचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने, फसलों को कीट एवं रोगों से होने वाले नुकसान को कम करने तथा कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के क्षमता विकास कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों के प्रसार के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
