डिजिटल पहचान से उपचार तक, स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा दे रही आभा आईडी

मरीज के पूरे स्वास्थ्य सफर को सुरक्षित और व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने की पहल

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आभा निर्माण के साथ स्कैन एंड शेयर से आसान हो रही पंजीकरण की प्रक्रिया

किशनगंज

स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी मरीज के लिए केवल समय पर इलाज मिलना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसके पुराने उपचार, जांच और चिकित्सकीय सलाह की जानकारी जरूरत पड़ने पर उपलब्ध होना भी उतना ही जरूरी है। अक्सर मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान पुरानी जांच रिपोर्ट, पर्ची और कागजात साथ लेकर चलना पड़ता है। कई बार दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने से चिकित्सक को मरीज की पिछली स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। इसी चुनौती को कम करने और प्रत्येक नागरिक के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को उसकी डिजिटल पहचान से जोड़ने के उद्देश्य से सरकार आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से आभा आईडी को बढ़ावा दे रही है।आभा आईडी के जरिए सरकार की मंशा ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करने की है, जहां मरीज की स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी सुरक्षित डिजिटल रूप में व्यवस्थित रहे और मरीज की सहमति से जरूरत पड़ने पर संबंधित चिकित्सक या स्वास्थ्य सेवा प्रदाता तक पहुंच सके। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतरता आएगी, अनावश्यक जांच दोहराने की संभावना कम हो सकती है और मरीज के उपचार संबंधी निर्णय लेने में चिकित्सक को पूर्व जानकारी मिलने से सुविधा होगी। यानी आभा आईडी केवल एक डिजिटल पहचान नहीं, बल्कि नागरिक के स्वास्थ्य सफर को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

जिले में बड़ी आबादी डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने बताया कि जिले की कुल 16,02,218 आबादी को आभा आईडी से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मुकाबले अब तक 11,58,065 लोगों की आभा आईडी बन चुकी है, जबकि 4,44,153 नागरिकों की आभा आईडी बनना शेष है। इस तरह जिले की करीब 72 प्रतिशत आबादी पहले ही डिजिटल स्वास्थ्य पहचान से जुड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि शेष नागरिकों को भी आभा आईडी से जोड़ने की प्रक्रिया को गति दी जाए, ताकि जिले की अधिक से अधिक आबादी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सके।

स्वास्थ्य रिकॉर्ड को संभालने की परेशानी होगी कम

आभा आईडी 14 अंकों की विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान है। इसके माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित और व्यवस्थित रख सकते हैं। जांच रिपोर्ट, चिकित्सकीय परामर्श और उपचार से जुड़ी जानकारी को डिजिटल माध्यम से रखा जा सकता है।इसका लाभ विशेष रूप से उन मरीजों को मिल सकता है, जो समय-समय पर अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार कराते हैं। मरीज की सहमति के आधार पर चिकित्सक को उसके पूर्व स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध होने से उपचार की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे मरीज को हर बार पुराने कागजात तलाशने और संभालकर रखने की परेशानी भी कम होगी।

सदर अस्पताल से स्वास्थ्य एवं आरोग्य मंदिर तक बन रही आभा आईडी

जिले में आभा आईडी निर्माण को किसी एक स्वास्थ्य संस्थान तक सीमित नहीं रखा गया है। जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्वास्थ्य एवं आरोग्य मंदिर सहित विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नागरिकों को आभा आईडी बनाने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ना है। स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों को आभा आईडी के फायदे की जानकारी देने के साथ ही निर्माण में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

स्कैन एंड शेयर ने पंजीकरण को बनाया आसान

डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्कैन एंड शेयर सुविधा भी है। इसके माध्यम से मरीज स्वास्थ्य संस्थान में उपलब्ध क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर ओपीडी पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकता है।जिले में अब तक 10,98,671 ओपीडी पंजीकरण स्कैन एंड शेयर के माध्यम से किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि जिले में नागरिक धीरे-धीरे डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। इससे पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाने में मदद मिल रही है, खासकर उन स्वास्थ्य संस्थानों में जहां मरीजों की संख्या अधिक रहती है।

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का डिजिटल पंजीकरण पूरा

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत स्वास्थ्य संस्थानों को भी डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। जिले में 295 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के स्वास्थ्य सुविधा पंजीकरण का लक्ष्य पूरा हो चुका है और सभी 295 संस्थान पंजीकृत हैं।स्वास्थ्य पेशेवरों को भी इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने का कार्य जारी है। रिपोर्ट के अनुसार नर्सों के लिए निर्धारित 123 के लक्ष्य के मुकाबले सभी 123 नर्सों का पंजीकरण पूरा हो चुका है। डॉक्टरों के पंजीकरण की दिशा में भी कार्य किया गया है। इसके अलावा निजी स्वास्थ्य संस्थानों को भी डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

जिलाधिकारी नवीन कुमार के नेतृत्व में जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुगम और तकनीक आधारित बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है। आभा आईडी के माध्यम से नागरिकों को अपनी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी व्यवस्थित रखने का विकल्प मिलने के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था को भी अधिक संगठित बनाने में मदद मिलेगी।वहीं सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी के स्तर से भी सभी स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और नागरिकों को आभा आईडी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले प्रत्येक पात्र नागरिक को आभा आईडी के महत्व की जानकारी मिले और उसके निर्माण में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

शेष नागरिकों को जोड़ना अब प्राथमिकता

जिले में 11.58 लाख से अधिक नागरिकों की आभा आईडी बनना डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है। अब शेष 4,44,153 नागरिकों को इस व्यवस्था से जोड़ना अगली प्राथमिकता है।आभा आईडी का विस्तार केवल आंकड़ों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को मरीज-केंद्रित, व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कदम है। सरकार चाहती है कि भविष्य में नागरिक की स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था में उपलब्ध रहे और उसकी सहमति से जरूरत के समय सही स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच आसान हो। जिले में आभा आईडी और स्कैन एंड शेयर जैसी सुविधाओं का बढ़ता उपयोग इसी बदलाव की ओर बढ़ता कदम है।

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